डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

...तो नहीं मिलेगी कोई मदद, ईरान के बाद डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर इराक, प्रधानमंत्री को लेकर दी धमकी

US End Support for Iraq: ट्रंप ने कहा कि अगर इराक में नूरी अल-मलिकी जैसे ईरान समर्थक प्रधानमंत्री बने, तो अमेरिका मदद बंद कर देगा; इससे इराक की समृद्धि और स्वतंत्रता खतरे में होगी।

अक्षय साहू

Trump Threat Iraq: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व में ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अब इराक को भी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि अगर इराक में अमेरिका की पसंद का प्रधानमंत्री नहीं चुना गया, तो अमेरिका इराक की मदद नहीं करेगा। यह चेतावनी उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी के फिर से सत्ता में आने की संभावनाओं के मद्देनजर दी है।

इसी से पहले इराक की संसद में सबसे बड़े शिया गुट, ईरान समर्थक कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क ने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में अल-मलिकी का नाम प्रस्तावित किया था। यह बात ट्रंप को पसंद नहीं आई। ट्रंप ने मंगलवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा कि “मैं सुन रहा हूं कि इराक जैसा महान देश नूरी अल-मलिकी को फिर से प्रधानमंत्री बनाकर बड़ी गलती करने वाला है। पिछली बार जब मलिकी सत्ता में थे, तब देश गरीबी और अराजकता में डूब गया था।”

ट्रंप ने इराक को दी चेतावनी

डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा कि ऐसा दोबारा नहीं होने देना चाहिए। अगर अल-मलिकी फिर चुने गए तो उनकी “पागलपन भरी नीतियों” के कारण अमेरिका अब इराक की मदद नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका साथ नहीं देगा तो इराक के पास सफलता, समृद्धि और स्वतंत्रता का कोई मौका नहीं रहेगा। उन्होंने इसे “MAKE IRAQ GREAT AGAIN” कहा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व युद्ध के कगार पर खड़ा है। अमेरिकी युद्धपोत ईरान के पास पहुंच चुके हैं और किसी भी समय अमेरिकी हमले की आशंका बनी हुई है। इस बीच इराक में मलिकी के प्रधानमंत्री बनने की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन अमेरिका ने पहले से ही शिया बहुल देश को चेतावनी दे दी है।

कौन हैं नूरी अल-मलिकी?

नूरी अल-मलिकी इराक के पूर्व प्रधानमंत्री हैं और इस्लामिक दावा पार्टी के वर्तमान प्रमुख हैं। उन्होंने 1970 के दशक की शुरुआत में पूर्व इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन का विरोध करके अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। 1979 में हुए अमेरिकी हमले के बाद उन्हें मौत की सजा से बचने के लिए देश छोड़ना पड़ा और वे 2003 तक निर्वासन में रहे।

इसके बाद वे 2006 से 2014 तक दो कार्यकाल के लिए इराक के प्रधानमंत्री रहे और सद्दाम के बाद के युग में देश के सबसे प्रभावशाली शिया नेताओं में से एक के रूप में उभरे। प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने सद्दाम हुसैन की फांसी रोकने से इनकार कर दिया था। इस दौरान उन पर इराक के विकास को रोकने में नाकाम रहने के आरोप लगे। अल-मलिकी ने 2014 में पीएम पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन राजनीतिक मंच से गायब नहीं हुए। वे 2014–2015 और फिर 2016–2018 तक उपराष्ट्रपति के रूप में भी काम करते रहे।

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