पाकिस्तान ने ड्रैगन से बढ़ाई दूरी, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

चीन का दोस्त बना दुश्मन! ड्रैगन ने पाकिस्तान से बढ़ाई दूरी, अब सऊदी पर भी कड़ी नजर

China distancing from Pakistan: चीन की विदेश नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जिन देशों के साथ बीजिंग ने भारत के खिलाफ रणनीतिक मोर्चा बनाया था, अब उन्हीं से वह दूरी बना रहा है।

अमन उपाध्याय

South Asia Tensions: चीन की विदेश नीति इन दिनों दिलचस्प मोड़ पर है। कभी बीजिंग के “भरोसेमंद साथी” रहे पाकिस्तान और सऊदी अरब अब धीरे-धीरे उसके रणनीतिक घेरे से बाहर होते दिख रहे हैं। पहले पाकिस्तान से रिश्तों में दरार और अब सऊदी अरब से तेल आयात में कमी ये सब संकेत हैं कि ड्रैगन अपनी प्राथमिकताएं बदल रहा है।

कभी पाकिस्तान और चीन के रिश्तों को “हर मौसम के दोस्ती” कहा जाता था। बीजिंग ने अरबों डॉलर का निवेश चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) में किया था, जो राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की रीढ़ माना जाता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। 2022 के बाद से चीन ने कई बड़े प्रोजेक्टों से हाथ खींच लिया। ML-1 रेलवे लाइन, काराकोरम हाइवे और ग्वादर पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट या तो ठप हैं या फिर अधर में लटके हुए हैं।

हमलों के बाद निवेश पर रोक

इस बदलाव की बड़ी वजह पाकिस्तान की राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा खतरे हैं। ग्वादर, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में चीनी इंजीनियरों पर हुए हमलों के बाद बीजिंग ने निवेश पर रोक लगा दी। चीन ने ML-1 रेलवे प्रोजेक्ट की लागत 10 अरब डॉलर से घटाकर लगभग 6 अरब डॉलर कर दी है।

पाकिस्तान अब अमेरिका की ओर

पाकिस्तान ने हाल के महीनों में अमेरिका से रिश्ते सुधारने की कोशिश की है। एफ-16 पुर्जों के सौदे और आर्थिक सहायता के संकेतों ने बीजिंग को असहज कर दिया। चीन की नीति साफ है “या तो पूरी तरह हमारे साथ रहो, या फिर बाहर।” इसी कारण उसने पाकिस्तान के साथ नए प्रोजेक्टों और सैन्य अभ्यासों को रोक दिया है।

अब सऊदी अरब की बारी

रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब से चीन का तेल आयात लगातार घट रहा है। नवंबर में बीजिंग केवल 36 मिलियन बैरल तेल खरीदेगा जो पिछले महीने से काफी कम है। यह केवल आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत है। चीन को लगता है कि रियाद धीरे-धीरे फिर से अमेरिका के खेमे में लौट रहा है। इजरायल-हमास संघर्ष के दौरान सऊदी अरब ने अमेरिका के साथ संतुलित रुख अपनाया, जिससे चीन का मध्य-पूर्वी प्रभाव कमजोर पड़ा। अब चीन रूस और ईरान से अधिक तेल खरीद रहा है, ताकि सऊदी को संदेश मिल सके कि बीजिंग पर भरोसा एकतरफा नहीं रहेगा।

भारत के लिए कूटनीतिक फायदा

दिलचस्प यह है कि पाकिस्तान और सऊदी अरब दोनों ने हाल के वर्षों में भारत के खिलाफ मोर्चाबंदी की थी। पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया, जबकि सऊदी अरब ने ओआईसी में इस्लामाबाद का समर्थन किया। लेकिन अब जब चीन इन दोनों देशों से दूरी बना रहा है, तो यह भारत की कूटनीतिक जीत मानी जा रही है। भारत ने पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं और अरब दुनिया में भी उसका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

बीजिंग अब यह समझता दिख रहा है कि जिन देशों पर उसने भरोसा किया था, वे दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार नहीं हैं। ड्रैगन का यह बदला हुआ रुख एशिया में शक्ति संतुलन को नई दिशा दे सकता है।

आज की ताजा खबर 16 अगस्त LIVE: एक क्लिक में पढ़ें दिनभर की सारी बड़ी खबरें

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में मीडिया की नो एंट्री! फोटो-वीडियो पर भी लगा बैन, नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

आचार्य प्रमोद कृष्णम का कांग्रेस पर बड़ा हमला, बोले- राहुल गांधी पाकिस्तान के राष्ट्रपति जैसे

Tamil Nadu NEET Protest: विधानसभा के नए प्रस्ताव के बावजूद चेन्नई में NEET के खिलाफ प्रदर्शन जारी

JPSC-JSSC पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का फूटा गुस्सा, हेमंत सोरेन के साथ राहुल-तेजस्वी का भी फूंका पुतला