Bhutan Earthquake Magnitude And Impact: भूटान में शनिवार शाम को तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में अफरातफरी मच गई। भारतीय समयानुसार शाम 4 बजकर 01 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.9 मापी गई।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार इस भूकंप का केंद्र भूटान के ग्येलपोजिंग में जमीन से 5 किलोमीटर नीचे था। भूकंप के तेज झटके पूर्वोत्तर भारत में भी महसूस किए गए, हालांकि गनीमत यह रही कि इससे किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं मिली।
भूटान में शनिवार शाम अचानक धरती हिलने से लोगों में अफरातफरी मच गई। भारतीय समयानुसार शाम 4 बजकर 01 मिनट पर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.9 दर्ज की गई।
भूकंप का केंद्र भूटान के ग्येलपोजिंग इलाके में जमीन से केवल 5 किलोमीटर नीचे था। कम गहराई पर केंद्र होने की वजह से आसपास के इलाकों में झटके तेज महसूस किए गए। भूकंप का असर भूटान के अलावा पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी महसूस किया गया।
हालांकि, शुरुआती जानकारी के मुताबिक भूकंप से किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने भी लोगों से घबराने के बजाय संयम बरतने की अपील की।
भूटान में इस साल भूकंप आने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 7 जून को भी देश में तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। उस समय भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.6 दर्ज की गई थी।
जून में आए भूकंप का केंद्र भूटान के पुणखा में था और इसकी गहराई जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे बताई गई थी। उस दौरान उत्तर बंगाल, पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों और बांग्लादेश में भी झटके महसूस किए गए थे।
लगातार भूकंपीय गतिविधियों के कारण हिमालयी क्षेत्र को लेकर वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों की सतर्कता बनी रहती है। भूटान भी भौगोलिक स्थिति के कारण भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है।
भूकंप पृथ्वी की बाहरी परत में होने वाली हलचल से पैदा होते हैं। धरती की सतह कई बड़ी टेक्टॉनिक प्लेट्स से बनी है, जो लगातार धीमी गति से घूमती और एक-दूसरे के संपर्क में आती रहती हैं।
जहां प्लेट्स आपस में टकराती या खिसकती हैं, वहां चट्टानों में तनाव पैदा हो सकता है। जब यह तनाव लंबे समय तक जमा होने के बाद अचानक रिलीज होता है, तो ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में बाहर निकलती है। इसी वजह से धरती की सतह पर भूकंप के झटके महसूस होते हैं।
भूटान और हिमालयी क्षेत्र में भारतीय और यूरेशियन प्लेट्स की गतिविधियां भूकंपीय जोखिम का एक प्रमुख कारण हैं। इन प्लेट्स की लगातार होने वाली हलचल के चलते इस क्षेत्र में भूकंप आते रहते हैं।
भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल के जरिए मापा जाता है। आम तौर पर कम तीव्रता वाले भूकंप से बहुत कम या कोई नुकसान नहीं होता, जबकि तीव्रता बढ़ने के साथ इमारतों और बुनियादी ढांचे पर असर का खतरा बढ़ सकता है।
4.9 तीव्रता का भूकंप महसूस किया जा सकता है, खासकर तब जब उसका केंद्र जमीन के नजदीक हो। हालांकि किसी भूकंप से वास्तविक नुकसान कितना होगा, यह केवल उसकी तीव्रता पर निर्भर नहीं करता। भूकंप की गहराई, केंद्र से दूरी, स्थानीय जमीन की प्रकृति और इमारतों की संरचना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।