लिफाफा चुनाव चिह्न को लेकर बंगाल में घमासान, AISF का EC के फैसले पर ऐतराज, कोर्ट जाने की दी चेतावनी

Democratic Trinamool Congress Symbol: AISF ने ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को दिए जाने पर आपत्ति जताई। नौशाद सिद्दीकी ने चुनाव आयोग के फैसले को कोर्ट में चुनौती देने के संकेत दिए।
AISF Envelope Symbol Dispute
AISF के विधायक नौशाद सिद्दीकी(सोर्स- सोशल मीडिया)
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AISF Envelope Symbol Dispute: ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (AISF) भारत चुनाव आयोग के उस फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने पर विचार कर रहा है, जिसमें उसके पंजीकृत चुनाव चिह्न 'लिफाफा' को रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट को आवंटित कर दिया गया है। आयोग ने इसी गुट को नया नाम ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ दिया है। 

पश्चिम बंगाल विधानसभा में AISF के इकलौते विधायक नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि 'लिफाफा' चिह्न पहले ही उनकी पार्टी को आवंटित किया जा चुका है। उन्होंने 2021 और 2026 के विधानसभा चुनावों में इसी निशान पर दक्षिण 24 परगना जिले के भांगड़ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था।

पार्टी को कमजोर करने के लिए हो रही साजिश

नौशाद सिद्दीकी ने कहा, हमने 10 मार्च 2026 को लिफाफा चिह्न को रिन्यू कराया था। हमने 'फ्री सिंबल' में से ही अपना चिह्न चुना था और चुनाव आयोग ने इसे मंजूरी दी थी। हम 2021 के विधानसभा चुनाव से ही इस निशान पर लड़ रहे हैं। मेरा सवाल है कि ऐसी स्थिति में वही निशान किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी को क्यों आवंटित किया गया? मुझे लगता है कि हमारी पार्टी को कमजोर करने की साजिश चल रही थी।

उन्होंने कहा, मैं भारतीय जनता पार्टी को बताना चाहता हूं कि जिस तरह से वे लगातार विपक्ष को कमजोर करने के लिए चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह आखिर में उनके लिए अच्छा नहीं होगा। नौशाद सिद्दीकी ने बताया कि AISF ने पहले ही चुनाव आयोग को पत्र भेजकर रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'लिफाफा' निशान आवंटित करने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो पार्टी कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।

शुक्रवार को आवंटित किया गया था सिंबल

चुनाव आयोग ने शुक्रवार को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'लिफाफा' निशान और 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम आवंटित किया था। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' का निशान आवंटित किया गया है। ये नई पहचान राज्य में होने वाले आगामी उपचुनावों में लागू होंगी।

दोनों गुटों को नए नाम और नए निशान का आवंटन चुनाव आयोग द्वारा गुरुवार को मूल नाम 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और मूल निशान 'फूल और घास' को फ्रीज करने के फैसले के बाद हुआ।

1998 में ममता बनर्जी के कांग्रेस से अलग होने के बाद स्थापित तृणमूल कांग्रेस ने अपनी स्थापना के बाद से सभी चुनाव ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और 'फूल और घास' के निशान पर लड़े हैं। पार्टी 2011 में पश्चिम बंगाल में सत्ता में आई और तब से राज्य की सत्तारूढ़ शक्ति बनी हुई है।

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