वर्धा के डोंगरगांव तालाब क्षेत्र में बाघ का खौफ, खेतों में जाने से कतरा रहे किसान

Tiger Sighted Hingni Malegaon: हिंगणी-मालेगांव मार्ग पर बाघ दिखने से ग्रामीणों और किसानों में भारी खौफ है। रास्ते में कंपनियों द्वारा दीवारें बनाने से वन्यजीव सड़कों और बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं।
Wardha Road Wildlife Corridor
हिंगणी-मालेगांव ठेका मार्ग पर बाघसोर्स- सोशल मीडिया
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Wardha Road Wildlife Corridor: वर्धा जिले के हिंगणी-मालेगांव ठेका मार्ग पर बाघ दिखाई देने से जंगल से सटे खेतों में काम करने वाले किसानों और नागरिकों में भय का माहौल है। गोहदा कला, धामनगांव और सालई पेवट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जंगल होने के साथ ही डोंगरगांव तालाब तथा आसपास का आरक्षित वन क्षेत्र वन्यजीवों के प्राकृतिक विचरण मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

वन्यजीवों के पारंपरिक विचरण मार्ग में बाधाएं

इस क्षेत्र में वन्यजीव नियमित रूप से आवागमन करते हैं। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, धामनगांव क्षेत्र में स्थापित रासायनिक कंपनी के कारण वन्यजीवों के पारंपरिक विचरण मार्ग में बाधाएं उत्पन्न हुई हैं। कंपनी परिसर के चारों ओर करीब 12 फीट ऊंची तार की जाली तथा कुछ स्थानों पर प्रीकास्ट दीवारें बनाई गई हैं। इससे वन्यजीवों के प्राकृतिक मार्ग प्रभावित होने की बात कही जा रही है।

वन्यजीवों से सुरक्षित रहने के दिशा-निर्देश

हिंगणी-मालेगांव के स्थानीय नागरिकों ने वन विभाग से क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियों पर नियमित निगरानी रखने, कैमरा ट्रैप लगाकर उनके विचरण मार्ग का अध्ययन करने तथा प्राकृतिक मार्गों में मौजूद बाधाओं को दूर करने की मांग की है।

इसके अलावा जंगल से सटे गांवों के किसानों और नागरिकों को वन्यजीवों से सुरक्षित रहने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश और जनजागृति अभियान चलाने की मांग भी की गई है। वन्यजीवों के प्राकृतिक विचरण मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए संबंधित विभागों द्वारा तत्काल प्रभावी कदम उठाने की जरूरत जताई जा रही है।

Wardha Road Wildlife Corridor
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सड़क मार्ग पर जानवरों का विचरण

विचरण मार्ग में बाधा आने के कारण वन्यजीव वैकल्पिक रास्ते के रूप में डामर सड़कों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे सड़क और मानव बस्तियों के आसपास वन्यजीवों की मौजूदगी बढ़ रही है तथा भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। गोहदा कला और सालई पेवट क्षेत्र बोर व्याघ्र प्रकल्प के बफर क्षेत्र से जुड़े होने के कारण वन्यजीवों की दृष्टि से संवेदनशील हैं।