Highlights:
येरेवन में COP17 से पहले जैव विविधता लक्ष्यों पर महत्वपूर्ण बैठक है
30 प्रतिशत जमीन-समुद्र सुरक्षा समेत 23 लक्ष्यों की समीक्षा
लगभग 90 प्रतिशत देशों ने लक्ष्य तय किए, लेकिन आधे से कम सही दिशा में बढ़ रहे हैं
COP17 Meeting On Climate Change: आर्मेनिया में सोमवार को लगभग 200 देश जलवायु संबंधित महत्वपूर्ण बातचीत के लिए इकट्ठा हो रहे हैं। सरकारों पर प्रकृति से जुड़े एक अहम समझौते को बचाने का दबाव है, जिसके लक्ष्य अब पहुंच से दूर होते जा रहे हैं। अगले महीने तुर्की के अंताल्या में COP17 की बैठक हो रही है। 31वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से पहले, 19 से 30 अक्टूबर तक आर्मेनिया के येरेवन में 'जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन' को लेकर मंथन चल रहा है।
COP17 में, देश पहली बार 'कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क' को लागू करने में अपनी सामूहिक प्रगति का जायजा लेंगे। यह 2022 में अपनाया गया एक महत्वपूर्ण समझौता है, जिसका लक्ष्य 2030 तक जैव विविधता के नुकसान को रोकना और उसे वापस बहाल करना है।
लगभग 200 देश 2030 के लिए 23 लक्ष्यों वाले एक ढांचे पर सहमत हुए हैं। इनमें दुनिया की कम से कम 30 प्रतिशत जमीन, आंतरिक जल क्षेत्रों और समुद्रों की सुरक्षा करना, खराब हो चुके 30 प्रतिशत पारिस्थितिक तंत्रों को बहाल करना, और जैव विविधता के लिए सभी स्रोतों से हर साल कम से कम 200 अरब डॉलर जुटाना शामिल है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक वित्त के रूप में हर साल 30 अरब डॉलर देने का वादा किया है, और प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाली सब्सिडी में से कम से कम 500 अरब डॉलर सालाना को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का संकल्प लिया है।
इस ढांचे में यह मांग की गई है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में जैव विविधता को शामिल किया जाए, और आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से मिलने वाले लाभों को अधिक समान रूप से साझा किया जाए।
COP17 में इस बात की समीक्षा की जाएगी कि देश अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दिशा में कहां खड़े हैं, कहां काम अधूरा रह गया है, और 2030 तक बचे चार वर्षों में क्या बदलाव करने की आवश्यकता है। यह समीक्षा मुख्य रूप से देशों द्वारा सौंपी गई राष्ट्रीय रिपोर्टों, जैव विविधता रणनीतियों और अन्य साक्ष्यों पर आधारित होगी।
रिपोर्ट के अनुसार शुरुआती आकलन बहुत उत्साहजनक नहीं रहे हैं। येरेवन बैठक से ठीक पहले जारी किए गए संयुक्त राष्ट्र के पहले वैश्विक प्रगति आकलन से पता चला है कि लगभग 90 प्रतिशत देशों ने राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य तो तय कर लिए हैं, लेकिन जिन लक्ष्यों का आकलन किया गया, उनमें से आधे से भी कम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट में काम को तेजी से लागू करने और बड़े लक्ष्य रखने की जरूरत बताई गई है।
चिंताजनक रिपोर्ट के आर्थिक और मानवीय परिणाम भी काफी गंभीर हैं। इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) में गिरावट का संबंध अक्सर खाद्य असुरक्षा, पानी की कमी, भीषण गर्मी और जंगलों में लगने वाली आग से होता है। वहीं, जंगलों और अन्य इकोसिस्टम के खराब होने से बारिश के पैटर्न में भी बदलाव आ सकता है।
इस साल सबसे अहम मुद्दों में से एक यह होगा कि क्या सरकारें 2030 के लक्ष्यों को असल कार्रवाई में बदल पाती हैं या नहीं। इस वैश्विक समीक्षा से उन कमियों का पता चलने की उम्मीद है जो काम को लागू करने में आ रही हैं। साथ ही, इससे यह तय करने का आधार भी मिलेगा कि देश किस तरह वापस सही रास्ते पर लौट सकते हैं।