नागपुर के जंगलों में दोगुने हुए बाघ! जैव विविधता को बड़ी सफलता,पहली आधिकारिक गणना में चौंकाने वाले संकेत

Nagpur Tiger Population: नागपुर प्रादेशिक वन विभाग की पहली आधिकारिक बाघ गणना के प्राथमिक आंकड़ों में जिले के जंगलों में 42 से 45 बाघ होने के संकेत मिले हैं। अंतिम आंकड़ों का अध्ययन अभी जारी है।
Tiger numbers double in Nagpur's forests! Major success for biodiversity; first official census reveals surprising findings.
नागपुर, बाघ गणना, वन विभाग,(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Nagpur Tiger Population: नागपुर जिले के के जंगलों की जैव-विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को एक बड़ी सफलता मिली है, नागपुर प्रादेशिक वन विभाग के इतिहास में पहली बार की गई आधिकारिक बाघ गणना के प्राथमिक आंकड़े सामने सामने आएं हैं जो चौकाने वाले हैं। आंकड़ों से आरंभिक आकलन यह लगाया गया है कि जिले के जंगलों में टाइगर की संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है।

पहले यह अनुमान था कि नागपुर के जंगलों में 18 के आसपास टाइगर हो सकते हैं। इस बार तकनीक की सहायता से जंगलों में गणना की गई और यह संकेत मिले हैं कि इन जंगलों में 42 से 45 टाइगर हो सकते हैं। वन विभाग अभी भी इन डेटा का सटीक अध्ययन कर रहा है लेकिन अधिकारियों की माने तो यह संख्या कहीं अधिक बढ़ सकती है लेकिन 45 से कम नहीं हो सकती।

पहली बार हुई वैज्ञानिक गणना

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा वर्ष 2026 में देशव्यापी स्तर पर किए गए बाघों की गणना के तहत नागपुर प्रादेशिक वनों का सर्वेक्षण किया गया। गौरतलब है कि वर्ष 2022 की पिछली राष्ट्रीय व्याघ्र गणना में नागपुर प्रादेशिक वन विभाग को शामिल नहीं किया गया था जिसके चलते इस वर्ष की गणना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।

कड़ी मेहनत और आधुनिक तकनीक का मेल

  • दिसंबर 2025 से शुरू हुई इस व्यापक गणना प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए वन विभाग ने पूरी तैयारी की थी। चूंकि विभाग के पास
  • सीमित संख्या में कैमरा ट्रैप्स उपलब्ध थे, इसलिए इसे 3 चरणों में पूरा किया गया।
  • तकनीकी इस्तेमाल पूरे इलाके में कुल 1.200 स्थानों पर कैमरा ट्रैप्स लगाए गए थे।
  • वैज्ञानिक पद्धति: केवल कैमरों पर निर्भर न रहते हुए बाघों के सटीक ठिकाने और आवाजाही का पता लगाने के लिए 'लाइन ट्रान्जेक्ट
  • मेथड का प्रभावी इस्तेमाल किया गया।

रामटेक और पारशिवनी बने बाघों का गढ़

प्राथमिक रिपोट के विश् लेाण से पता चलता है कि नागपुर प्रादेशिक वन विभाग के अंतर्गत आने वाले रामटेक, पारशिवनी, पवनी तथा दक्षिण

और उत्तर उमरेड वन क्षेत्रों में बाघों का घनत्व सबसे अधिक है।

सूत्रों के अनुसार अब तक इन क्षेत्रों में मात्र 18 बाघ होने का अनुमान लगाया जाता था लेकिन वैज्ञानिक तरीके से हुई इस पहली आधिकारिक गणना ने इस आंकड़े को दोगुना से भी अधिक साबित कर दिया है।

जंगल की सेहत का भी हुआ आकलन

  • इस विशेष मुहिम का उद्देश्य केवल चाधों की संख्या गिनना ही नहीं था बल्कि जंगल के समग्र स्वास्थ्य का आकलन करना भी था। इसके
  • तहत गहन डेटा एकत्रित किया गया है।
  • वनस्पतियों और वृक्ष संपदा की स्थिति।
  • जलचर, उभयचर जीवों और पक्षियों की विविधता।
  • जंगलों में मानवीय हस्तक्षेप का स्तर।
  • वन विभाग ने इस विस्तृत रिपोर्ट और डेटा को व्याघ्र गणना के संयोजक (अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक पूर्व) के पास विश्लेषण के लिए
  • सौंप दिया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा अंतिम रिपोर्ट जारी किए जाने के बाद इस संख्या पर आधिकारिक मुहर लग जाएगी।
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