Narad Rai Statement On Akhilesh Yadav: भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री नारद राय ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। सपा के लंबे समय तक कद्दावर नेता रहे नारद राय ने अपने राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि जब अखिलेश यादव छोटे थे, तब वह उनके पिता और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के साथ राजनीति कर रहे थे।
नारद राय ने सपा कार्यालय में लगे पोस्टरों और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने लंबे समय तक कांग्रेस के खिलाफ राजनीति की। उन्होंने दावा किया कि मुलायम सिंह यादव कांग्रेस को देश की विरोधी पार्टी बताते थे और समाजवादी आंदोलन कांग्रेस की नीतियों के खिलाफ संघर्ष करता रहा।
भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस राजनीतिक बयान का समर्थन किया, जिसमें सपा और कांग्रेस की नजदीकियों पर सवाल उठाए गए थे। नारद राय ने कहा कि जिस कांग्रेस के खिलाफ समाजवादी पार्टी वर्षों तक संघर्ष करती रही, आज उसी के साथ उसके राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं।
अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए नारद राय ने कहा कि राजनीति में संघर्ष की क्षमता जरूरी होती है। उनका दावा है कि यदि सपा का मौजूदा राजनीतिक रवैया जारी रहा तो वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने कथित तौर पर प्रसारित एक आपत्तिजनक वीडियो की निंदा करते हुए कहा कि किसी नेता या कार्यकर्ता के खिलाफ इस तरह की सामग्री सार्वजनिक करना उचित नहीं है। नारद राय ने कहा कि राजनीति में एक-दूसरे के सम्मान का ध्यान रखा जाना चाहिए।
अपने राजनीतिक अनुभव का उल्लेख करते हुए नारद राय ने कहा, “जब अखिलेश यादव ठीक से पैंट पहनना भी नहीं जानते थे, तब मैं उनके पिता मुलायम सिंह यादव के बगल में बैठकर राजनीति करता था।” उन्होंने अखिलेश यादव से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की भी मांग की।
शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव को लेकर भी नारद राय ने सपा के भीतर वरिष्ठ नेताओं के सम्मान पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी में वरिष्ठ नेताओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा है।
नारद राय लंबे समय तक समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे और मुलायम सिंह यादव के करीबी नेताओं में उनकी गिनती होती थी। वे वर्ष 2002 में पहली बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक बने और प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे। वर्ष 2012 में दोबारा विधायक बनने के बाद अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। उस दौरान उन्होंने खादी एवं ग्रामोद्योग, खेलकूद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समेत विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
सपा में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच चले राजनीतिक विवाद के दौर में नारद राय मुलायम सिंह और शिवपाल यादव के करीबी माने जाते थे। जनवरी 2017 में वह समाजवादी पार्टी छोड़कर बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए। बसपा ने उन्हें बलिया नगर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, हालांकि चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
वर्ष 2017 में बसपा छोड़ने के बाद नारद राय बाद के वर्षों में फिर समाजवादी पार्टी के साथ जुड़े। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने उन्हें बलिया नगर सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था।
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान नारद राय ने समाजवादी पार्टी छोड़ दी। इसके बाद 29 मई 2024 को बलिया में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। उनके भाजपा में शामिल होने को बलिया की राजनीति में सपा के लिए एक बड़ा झटका माना गया था।
अब भाजपा में शामिल होने के बाद नारद राय लगातार समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर हमलावर हैं। उनके ताजा बयान ने बलिया समेत पूर्वांचल की राजनीति में एक बार फिर सियासी बहस तेज कर दी है।