Jitendra Mishra: कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, जो बने राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO?

Who is Air Marshal Jitendra Mishra: अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर के नए CEO। महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडेय और निर्मला यादव तीन नए ट्रस्टी बने हैं।
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एयर मार्शल जितेंद्र मिश्राडिजाइन फोटो
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Who is Ram Mandir Trust New CEO Air Marshal Jitendra Mishra: राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO का ऐलान हो गया है। भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को यह जिम्मेदारी मिली है। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न कमांड की कमान संभाली थी। साथ ही तीन नए ट्रस्टी महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडेय और निर्मला यादव भी नियुक्त किए गए हैं।

राम मंदिर ट्रस्ट के इतिहास में यह पहली बार है, जब किसी पूर्व सैन्य शीर्ष अधिकारी को मंदिर प्रबंधन की इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंदिर परिसर के लगातार विस्तार, बढ़ती व्यवस्थाओं और हाईटेक सुरक्षा तंत्र को देखते हुए लंबे समय से एक सख्त, अनुभवी और कुशल प्रशासक की जरूरत महसूस की जा रही थी। ऐसे में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को सीईओ की जिम्मेदारी दिए जाने को अहम फैसला माना जा रहा है।

कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद लगी मुहर

राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ के चयन के लिए एक उच्चस्तरीय चयन समिति का गठन किया गया था। इसमें रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और विशेषज्ञ सदस्य सुरेश हावरे शामिल थे।

चयन प्रक्रिया के तहत शुरुआत में 16 योग्य उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया और उनके इंटरव्यू लिए गए। इसके बाद पूर्व आईएएस अधिकारी दिनेश चंद्र और योगेश्वर मिश्रा समेत छह प्रमुख उम्मीदवारों का पैनल तैयार कर ट्रस्ट के सामने रखा गया।

आखिर में ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के आवास पर हुई महत्वपूर्ण बैठक में सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श के बाद पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई।

मिराज-2000 से दुश्मन के ठिकानों को किया था तबाह

पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के सम्मानित और अनुभवी फाइटर पायलट रहे हैं। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

वह उस विशेष तकनीकी टीम के प्रमुख सदस्यों में शामिल थे, जिसने मिराज-2000 लड़ाकू विमानों में लेजर-गाइडेड बमों को इंटीग्रेट करने का चुनौतीपूर्ण काम पूरा किया था। इस तकनीक ने भारतीय वायुसेना को दुश्मन के ठिकानों पर बेहद सटीक हमले करने में मदद की।

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इन्हीं सटीक हमलों के जरिए टाइगर हिल और मुंथो ढालो जैसे महत्वपूर्ण इलाकों में मौजूद दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाया गया। कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना की यह कार्रवाई बेहद निर्णायक साबित हुई और युद्ध में भारत की स्थिति मजबूत करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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