प्रेमानंद महाराज-विराट कोहली  (सोर्स- सोशल मीडिया)
मथुरा

क्या करोड़ों रुपये खर्च कर बढ़ाई गई प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता? जानें दावे में कितनी सच्चाई

Truth Behind Premanand Maharaj Popularity: प्रेमानंद महाराज की प्रसिद्धि को लेकर दिनेश फलाहारी महाराज के दावों से विवाद बढ़ता जा रहा है। हालांकि विराट कोहली ने उनके आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया।

स्निग्धा श्रीवास्तव

Dinesh Falhari Maharaj Allegations Against Premanand Maharaj: हाल ही में वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण (दीपक लोधी) की संदिग्ध स्थितियों में हुई मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जहां एक तरफ आए दिन रसिक दुलारी शरण (दीपक लोधी) के मौत को लेकर तरह तरह के वीडियो वायरल किए जा रहे है और मौत के पीछे के कई कारणों की सीबीआई जांच के मांग हो रही है।

वहीं दूसरी तरफ प्रेमानंद महाराज के अस्तित्व पर भी सवाल उठे रहे है। दावा किया जा रहा है कि उनकी यह प्रसिद्धि अपनी खुद की नहीं है यानि उन्हें विश्व प्रसिद्ध बनाने के लिए करोड़ो रूपए खर्च किए गए है सोशल मीडिया का भी सहारा लिया गया है। हालांकि इन दावों की अभी तक कोई अधिकारिक पुष्टि नही हुई है। आइए जानते है पूरा मामला क्या है? यह दावा किसने किया है? और दावों में कितनी सच्चाई है-

आइए जानें क्या कहते दिनेश फलाहारी महाराज

वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज को लेकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया। दरअसल दिनेश फलाहारी महाराज ने आश्रम के भीतर ही दो गुट होने का दावा किया और कहा कि आश्रम में दो गुट बनाए गए है। एक वह गुट है जिसमें वास्तविक साधु संत रहते है वे प्रेमानंद महाराज के साथ रहते है, जबकि दूसरा गुट वह है जो आश्रम में संत की आड़ में पैसे कमाने की चाह रखते है।

दिनेश फलाहारी महाराज ने दावा किया दूसरे गुट ने प्रेमानंद महाराज से संपर्क कर उन्हें प्रसिद्धि दिलाने की बात कही है जिसके बाद विराट कोहली को 5 करोड़ देकर आश्रम बुलाया गया। इसके बाद से प्रेमानंद महाराज के प्रवचनों के वीडियो वायरल किए जाने लगे।

विराट कोहली के संपर्क में आने के बाद बढ़ी लोकप्रियता?

दिनेश ने दावा किया कि राजस्थान के एक प्रॉपर्टी कारोबारी समूह ने प्रेमानंद महाराज को देश-दुनिया में प्रसिद्ध कराने की पहल की। इसी दौरान विराट कोहली को भी प्रेमानंद महाराज के संपर्क में लाया गया। हालांकि ऐसी रणनीति में प्रेमानंद महाराज शामिल नहीं है लेकिन उनके माध्यम से दूसरे गुट जिसमें कई बड़ी कंपनियों के लोग शामिल है उन्होंने इसका अत्यधिक लाभ उठाया है।

फलाहारी महाराज का आरोप है कि प्रेमानंद महाराज पहले बेहद साधारण और सीधे-सादे संत के रूप में जीवन व्यतीत कर रहे थे। लेकिन विराट कोहली के संपर्क में आने और इसके बाद सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से चर्चा बढ़ने के साथ प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। उन्होंने दावा किया कि बाद में मतभेद बढ़ने पर प्रेमानंद महाराज ने पहले वाले समूह से दूरी बना ली और अपने अन्य साथियों के साथ बेलवन आश्रम में रहकर भजन-साधना करने लगे।

फलाहारी महाराज ने यह भी आरोप लगाया है कि साधु वेशधारी के दूसरे गुट ने बेलवन आश्रम के आसपास यमुना डूब क्षेत्र की जमीनों को भी बेच दिया और भूमाफिया व अधिकारियों की मिलीभगत से वे यमुना खादर की भी जमीन बेच रहे हैं।

जनता ने किया दिनेश फलाहारी का विरोध

दिनेश फलाहारी महाराज के दावों पर सोशल मीडिया से लेकर प्रेमानंद महाराज के अनुयायियों जमकर विरोध किया है। भक्तो का मानना है कि प्रेमानंद महाराज को किसी प्रसिद्धि की आवश्यकता नही है। उनका जीवन ही लोगों के लिए प्रेरणादायक है जिससे लोग स्वयं ही उनकी तरफ आकर्षित होते है।

ज्योतिषाचार्य शिवाश्री ऋतु सिंह की प्रतिक्रिया

प्रेमानंद महाराज को लेकर दिनेश फलाहारी महाराज के दावों पर ज्योतिषाचार्य और आध्यात्मिक वक्ता शिवाश्री ऋतु सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रेमानंद महाराज का बचाव करते हुए कहा कि महाराज की लोकप्रियता को केवल किसी सेलिब्रिटी या इन्फ्लुएंसर के जैसी नहीं है। बल्कि प्रेमानंद महाराज की पहचान उनकी सादगी, आध्यात्मिक विचारों और उनके प्रेरणादायक जीवन से है। और यही कारण है कि उन पर लोगों की आस्था से बनी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रेमानंद महाराज को प्रसिद्ध होने के लिए किसी भी प्रचारक की आवश्यकता नहीं है।

शिवाश्री ऋतु सिंह ने यह भी कहा कि प्रेमानंद महाराज ही नहीं पिछले कुछ वर्षों से हिंदू धर्म और धर्म गुरुओं को लेकर लगातार तरह-तरह के आरोप लगाए जा रहे है और राजनीतिक हमलों भी हो रहे है। हिंदू धर्म और धर्म गुरुओं को लेकर एक तरह का प्रोपेगेंडा और राजनीतिक हमला आम हो गया है। यही कारण है कि इस ट्रेंड में प्रेमानंद महाराज का भी नाम जोड़ा जा रहा है। उनके ऊपर भी लांछन लगाने की कोशिश की जा रही है, ताकि उनका नाम खराब हो जाए।

शिवाश्री ऋतु ने कहा कि मैं स्वयं वृंदावन से बहुत ज्यादा जुड़ी हूं और जानती हूं कि प्रेमानंद महाराज पर्सनली कभी किसी को पैसे देकर नहीं बुलाते है। प्रेमानंद महाराज को प्रसिद्धि राधा रानी की कृपा, उनकी सादगी और लोगों के प्रेम के कारण मिली है।

विराट कोहली ने दिनेश फलाहारी के दावों को किया खारिज

दिनेश फलाहारी महाराज के दावों को विराट कोहली ने खारिज कर दिया है। विराट कोहली ने कहा कि यह सभी आरोप भ्रामक, झूठे और बेबुनियाद है। विराट कोहली ने कहा कि प्रेमानंद महाराज को लेकर उनकी अपनी स्वयं की आस्था है। इसलिए वह प्रेमानंद महाराज से मिलने आते है।

जी हां दरअसल लगातार सोशल मीडिया पर हो रहे है तरह- तरह के दावों के बाद आज इस मामलें को लेकर विराट कोहली ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। कोहली की तरफ से उनकी टीम ने आधिकारिक बयान जारी किया है। जिसके मुताबिक विराट कोहली के प्रवक्ता ने स्पष्ट रूप से कहा कि हम साफ तौर पर बताना चाहते हैं कि फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा ने विराट कोहली को लेकर जो भी दावे किए हैं, वह पूरी तरह से झूठे, बेबुनियाद और तथ्यहीन है।

प्रेमानंद महाराज के प्रति विराट कोहली की अपनी गहरी आस्था और श्रद्धा है। जिसके कारण वह उनसे मिलने जाते हैं। हम इन दावों का पुरजोर खंडन करते हैं। प्रवक्ता ने मीडिया से आग्रह करते हुए कहा है कि वे ऐसी बातों को रिपोर्ट ना करे और आगे बढ़ाने से पहले तथ्यों की जांच कर जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग करें।

प्रवक्ता द्वारा जारी नोट

कौन हैं दिनेश फलाहारी महाराज

बता दें कि दिनेश फलाहारी महाराज पहले भी कई मुद्दों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। दिनेश फलाहारी ने ही श्रीकृष्‍ण जन्‍मभूमि संघर्ष न्‍यास का गठन किया है। वे श्रीकृष्‍ण जन्‍भूमि वाद के पक्षकार के रूप में केस लड़ रहे हैं। करीब तीन साल पहले उन्होंने कसम खाई थी कि जब तक मथुरा में कृष्‍ण मंदिर से मस्जिद नहीं हटाई जाएगी, वे ना भोजन ग्रहण करेंगे और ना ही अपने पैरों में पादुका पहनेंगे। वह आज भी अपनी प्रतिज्ञा पर अटल हैं, वे केवल फलों का सेवन करते है। यही कारण है कि उनका नाम फलाहारी महाराज पड़ा।

कौन हैं संत प्रेमानंद महाराज

संत प्रेमानंद महाराज का मूल नाम अनिरुद्ध कुमार पांडेय है। संत प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर में सरसोल ब्लॉक के अखरी गांव में हुआ था। वह केवल संत ही नहीं है, बल्कि उन्हें उनके भक्त कलयुग में भगवान का रूप मानते है। बताया जाता है कि संत प्रेमानंद महाराज ने हमेशा से अकेले रहे। उन्होंने मात्र बड़े महापुरुषों का संग किया। उन्हें हमेशा यही अनुभूति होती थी कि भगवान उनके साथ हैं। मात्र 13 वर्ष की आयु में अपना घर-बार सब छोड़ देने वाले संत ने कभी किसी का सहारा नहीं लिया। एक बार सत्संग के दौरान उन्होंने स्वयं बताया था कि काशी के घाटों पर उन्हें भगवान शिव का अनुभव हुआ। इतना ही नहीं उन्होंने स्वयं साकार रूप से शिव का साक्षात्कार किया।

धर्म पुराणों में कहा जाता है कि जैसी भक्त की भावना होती है वैसी ही भगवान उन्हें दिखाई देते है। बस भक्त प्रेमानंद को भगवान शिव को देखने की भावना थी और भगवान शिव उन्हें प्रकट मिलें। बताया जाता है कि प्रेमानंद महाराज ने कई -कई दिन भूखे रहकर, बस एक भगवान का नाम ही जप किया। उसके बाद भगवान के दर्शन के बाद भगवान ने उन्हें वृंदावन के कार्य के लिए भेज दिया।

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