कार्यक्रम के मुख्य वक्ता (सोर्स- फोटो नवभारत)
मथुरा

मथुरा में पॉक्सो एक्ट-2012 को लेकर जागरूकता कार्यक्रम, छात्राओं को बताए गए कानूनी अधिकार

Mathura News: एसएसएम गर्ल्स इंटर कॉलेज में पॉक्सो एक्ट-2012 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ। न्यायिक अधिकारियों ने छात्राओं को बाल सुरक्षा, कानूनी अधिकार, व्यक्तिगत सीमाओं-साइबर सुरक्षा की जानकारी दी।

मोहन श्याम शर्मा, स्निग्धा श्रीवास्तव

POCSO Act Awareness Program Mathura: मथुरा-वृंदावन स्थित एसएसएम गर्ल्स इंटर कॉलेज में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए पॉक्सो एक्ट-2012 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा, व्यक्तिगत सीमाओं, सुरक्षित एवं असुरक्षित व्यवहार, साइबर सुरक्षा और उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय, मथुरा परविंदर सिंह ने विद्यार्थियों को पॉक्सो एक्ट-2012 यानी बाल लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम के महत्वपूर्ण प्रावधानों की सरल भाषा में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को लैंगिक अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए कानून में विशेष प्रावधान किए गए हैं।

जजों ने छात्राओं को किया जागरूक

मथुरा में हुए जागरूकता शिविर बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने और उन्हें उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से पॉक्सो अधिनियम को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के तहत न्यायिक अधिकारियों ने बालिका कॉलेजों में पहुंचकर छात्राओं से संवाद किया और उन्हें पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों, अधिकारों तथा किसी भी तरह के शोषण की स्थिति में उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दी।

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को बताया गया कि बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने के लिए पॉक्सो यानी लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 बनाया गया है। इस कानून के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को विशेष कानूनी संरक्षण दिया गया है। छात्राओं को समझाया गया कि किसी भी प्रकार का अनुचित स्पर्श, अश्लील व्यवहार, यौन उत्पीड़न या ऑनलाइन माध्यम से होने वाला शोषण गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है।

साइबर अपराधों के प्रति किया सचेत

न्यायिक अधिकारियों ने छात्राओं से कहा कि उन्हें किसी भी असहज या संदिग्ध परिस्थिति को छिपाना नहीं चाहिए। यदि कोई व्यक्ति उन्हें डराता-धमकाता है, अनुचित व्यवहार करता है या सोशल मीडिया और मोबाइल के जरिए परेशान करता है, तो इसकी जानकारी भरोसेमंद अभिभावक, शिक्षक या संबंधित अधिकारियों को तुरंत दी जानी चाहिए।

कार्यक्रम में छात्राओं को साइबर माध्यम से होने वाले अपराधों के प्रति भी सचेत किया गया। उन्हें बताया गया कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से बातचीत करते समय सावधानी बरतें और अपनी निजी तस्वीरें, वीडियो, मोबाइल नंबर, पासवर्ड अथवा अन्य संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा न करें। किसी व्यक्ति द्वारा ब्लैकमेल या धमकी दिए जाने की स्थिति में डरने के बजाय तत्काल सहायता लेने की सलाह दी गई।

जागरूकता अभियान के दौरान छात्राओं ने न्यायिक अधिकारियों से कानून से जुड़े सवाल भी पूछे। अधिकारियों ने छात्राओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए बताया कि कानून पीड़ित बच्चों की सुरक्षा और गरिमा को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। ऐसे मामलों में बच्चे के हित को प्राथमिकता दी जाती है और उसकी पहचान की गोपनीयता बनाए रखने के प्रावधान भी हैं।

अधिकारियों ने छात्राओं से कहा कि कानून की जानकारी उन्हें केवल अपराध के बाद कार्रवाई के लिए नहीं, बल्कि अपराध से बचाव और समय रहते मदद लेने के लिए भी सशक्त बनाती है। विद्यालय और परिवार की भूमिका भी बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण है।

जागरूकता ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी

अभियान के दौरान छात्राओं को यह संदेश दिया गया कि जागरूकता ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी है। किसी भी तरह के अपराध या उत्पीड़न की आशंका होने पर चुप रहने के बजाय समय रहते आवाज उठाना जरूरी है।

इस दौरान कॉलेज की शिक्षिकाएं, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं। कार्यक्रम के अंत में छात्राओं को बाल सुरक्षा और पॉक्सो अधिनियम के प्रति जागरूक रहने तथा अन्य बच्चों को भी इसके बारे में जानकारी देने के लिए प्रेरित किया गया।

उन्होंने विद्यार्थियों को अपने शरीर, व्यक्तिगत सीमाओं और गरिमा के प्रति सजग रहने की सलाह दी। किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार या असहज स्थिति का सामना होने पर चुप रहने के बजाय माता-पिता, शिक्षक या किसी विश्वसनीय वयस्क को इसकी जानकारी देने के लिए प्रेरित किया गया। विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि समय रहते सही व्यक्ति तक जानकारी पहुंचाना उनकी सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कार्यक्रम में रूपेश चौधरी और राहुल अग्रवाल, असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल, मथुरा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कानूनी अधिकारों के साथ-साथ बच्चों की जिम्मेदारियों और सुरक्षित व्यवहार के बारे में जानकारी दी। विद्यार्थियों से सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने तथा किसी भी संदिग्ध या असहज स्थिति में उचित माध्यम से सहायता लेने का आह्वान किया गया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए कानून और बाल सुरक्षा से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे। न्यायिक अधिकारी और अन्य वक्ताओं ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। संवादात्मक तरीके से आयोजित कार्यक्रम में कानून की जानकारी को व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाने का प्रयास किया गया।

कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि बच्चों को अपने अधिकारों और सुरक्षा के उपायों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। जागरूक विद्यार्थी न केवल स्वयं को सुरक्षित रखने के प्रति सजग हो सकते हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर अपने साथियों को भी सही सहायता उपलब्ध कराने का माध्यम बन सकते हैं। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ यह संदेश दिया कि किसी भी अनुचित व्यवहार को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते आवाज उठाना जरूरी है।

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