यूपी में सरकारी नौकरी के लिए नए नियम (सोर्स: सोशल मीडिया)
लखनऊ

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए एक और शर्त, तैयारी करने वाले जरूर पढ़ें ये खबर!

Uttar Pradesh Character Verification: पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के लिए नए सिरे से चरित्र सत्यापन आवश्यक नहीं होगा लेकिन उनके पिछले विभाग से जरूरी जानकारी ली जा सकती है।

नमिता प्रजापति

Highlights:

  • सत्ता परिवर्तन की साजिश में शामिल लोगों की नौकरी पर संकट

  • राजनीतिक विचारधारा के आधार पर कोई अभ्यर्थी अयोग्य नहीं

  • चरित्र सत्यापन के नियम हुए सख्त

UP Character Verification Rules: अगर आप उत्तर प्रदेश के निवासी है और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे है तो ये खबर आपके लिए है। अगर कोई अभ्यार्थी हिंसक गतिवि​धयों में शामिल हुआ तो उसका सरकारी नौकरी पाने का सपना सपना ही रह जाएगा। दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों के चरित्र सत्यापन का सख्त नियम जारी किए हैं। जारी निर्देशों के अनुसार सत्ता परिवर्तन की साजिश में शामिल होने वाले लोगों की नौकरी पर संकट आ सकता है। जो अभ्यार्थी हिंसा के माध्यम से सत्ता परिवर्तन कराने या सरकार बदलने की गतिविधियों में शामिल होता है तो उसे सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है।

हालांकि निर्देश में यह भी बताया गया है कि केवल राजनीतिक विचारधारा, एफआईआर दर्ज होने या लंबित जांच के आधार पर किसी अभ्यर्थी को अयोग्य नहीं माना जाएगा। यह शासनादेश नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम देवराज की ओर से हाईकोर्ट के निर्देश के पालन के तहत जारी किए गए हैं। नई नीति के तहत डकैती, बलात्कार, लज्जा भंग, भ्रष्टाचार, हत्या, आतंकवादी कृत्य, पेपर लीक और सॉल्वर गैंग आदि से जुड़े मामलों संलिप्त पाए जाने वाले अभ्यार्थियों के लिए सरकारी नौकरी के दरवाजे हमेशा हमेशा के लिए बंद कर दिए जाएंगें।

30 दिन में देनी होगी सत्यापन रिपोर्ट

चरित्र सत्यापन के शर्तों को योगी सरकार ने अधिक कठोर किया। जारी शासनादेश में सरकारी विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों की सीधी भर्ती के लिए चरित्र सत्यापन को लेकर सख्ती की बात कही गई है। साथ ही यह भी बताया गया ​है कि केवल एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी को स्वयं ही अयोग्य नहीं माना जाएगा लेकिन उसकी जांच होगी। पुलिस को 30 दिन के अंदर सत्यापन रिपोर्ट देनी होगी। पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के लिए नए सिरे से चरित्र सत्यापन आवश्यक नहीं होगा लेकिन उनके पिछले विभाग से जरूरी जानकारी ली जा सकती है।

21 साल की उम्र पूरी करने के बाद और उस पर दर्ज मामले की जांच की तारीख से तीन साल के भीतर अगर वह ऐसी किसी भी गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो यह माना लिया जाएगा कि वह अब भी ऐसी गतिविधियों में सक्रिय रूप से संलग्न है। इसके साथ ही ऐसे मामलों में अभ्यार्थी के व्यवहार में आए परिवर्तन का भी संज्ञान लिया जाएगा यानी की अगर किसी व्यक्ति की विचार और व्यवहार में अच्छा बदलाव दिखेगा तो उसकी नौकरी देने पर विचार किया जा सकेगा।

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