

Highlights:
दिल्ली हाई कोर्ट ने IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED को नोटिस जारी किया।
IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होगी।
ईडी ने PMLA की धारा 5 के तहत 44.75 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की थी।
IRCTC Money Laundering Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपने खिलाफ आरोप तय किए जाने को चुनौती देने वाली RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने उन्हें यह छूट भी दी है कि वे हाई कोर्ट में अगली सुनवाई तक ट्रायल कोर्ट से रोक (स्टे) की मांग कर सकते हैं। यह सुनवाई 3 दिसंबर को होनी है। लालू यादव ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को 10 सितंबर को चुनौती दी थी। अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होगी।
इससे पहले, 11 सितंबर को दिल्ली की एक विशेष अदालत ने IRCTC होटल घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक अहम फैसला सुनाया था। अदालत ने RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी उनके बेटे तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दे दिया था।
ईडी ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002' (PMLA) के तहत इस मामले की जांच शुरू की थी। बता दें, कि यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा नई दिल्ली में दर्ज की गई एक FIR पर आधारित थी।
CBI ने जांच के तहत तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, पी.सी. गुप्ता और अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। सीबीआई ने भारतीय दंड संहिता (IPC) और 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988' की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
सीबीआई जांच के अनुसार, उस समय के तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपने आधिकारिक पद का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने स्थापित नियमों की अनदेखी की और पुरी तथा रांची में रेलवे होटलों के विकास और संचालन का ठेका 'मेसर्स सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड' को दिया।
तत्काली रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने इसके बदले में, 'मेसर्स डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड' को बहुत कम कीमत पर 2 एकड़ जमीन मुहैय्या करायी और सौदा किया। इस कंपनी के मालिक और नियंत्रक लालू यादव के करीबी सहयोगी प्रेम चंद गुप्ता के परिवार के सदस्य थे।
इतना ही नहीं बाद में, बहुत कम कीमत पर शेयर खरीदकर इस जमीन और कंपनी का पूरा कंट्रोल अपनी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव को सौंप दिया, जिससे की घूम-फिरकर इस जमीन का मालिकाना हक पूरी तरह से यादव परिवार के पास वापस आ गया।
IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले का खुलासा होने के बाद ईडी ने PMLA की धारा 5 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 44.75 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की थी। बाद में, एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने भी इस कदम को सही ठहराया। इस मामले में, ईडी ने 24 अगस्त 2018 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष न्यायाधीश के समक्ष एक अभियोजन शिकायत दायर की थी।