

केंद्र सरकार ने वक्फ बोर्ड के प्रतिवेदन पर फैसला होने तक मस्जिद नहीं गिराने का आश्वासन दिया।
सरकार ने प्रतिवेदन पर निर्णय के लिए करीब चार सप्ताह का समय लगने की बात कही।
दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी।
Delhi High Court Hearing on Race Course Masjid: केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को आश्वासन दिया है कि दिल्ली के रेस कोर्स इलाके में स्थित मस्जिद को तब तक नहीं गिराया जाएगा, जब तक दिल्ली वक्फ बोर्ड के प्रतिवेदन पर फैसला नहीं ले लिया जाता। केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील आशीष दीक्षित ने गुरुवार को न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ को बताया कि प्रतिवेदन पर जल्द फैसला लेने की कोशिश की जाएगी। इसमें करीब चार सप्ताह का समय लग सकता है। मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि दिल्ली वक्फ बोर्ड के प्रतिवेदन पर फैसला होने तक मस्जिद को गिराने की कार्रवाई नहीं की जाएगी। सरकार के इस रुख के बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 दिसंबर की तारीख तय की।
केंद्र सरकार के वकील ने याचिकाकर्ता के याचिका दाखिल करने के अधिकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दलील दी कि यदि कई नमाजी इस तरह अदालत का रुख करने लगेंगे तो ‘भानुमति का पिटारा’ खुल सकता है। याचिकाकर्ता सैयद अहमद सउद की ओर से पेश वकील एम. सुफियान सिद्दीकी ने इस दलील का विरोध किया।
इससे पहले 27 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को भरोसा दिलाया था कि अगली सुनवाई तक रेस कोर्स मस्जिद के खिलाफ कोई तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। याचिका में मस्जिद को संभावित विध्वंस से बचाने और नमाजियों के लिए वहां निर्बाध पहुंच बहाल करने की मांग की गई है।
रेस कोर्स मस्जिद, रेस कोर्स क्लब परिसर में स्थित है। यह इलाका लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री आवास के नजदीक है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील एम. सुफियान सिद्दीकी ने अदालत में कहा कि मस्जिद को गिराए जाने का खतरा है। उन्होंने दावा किया कि 7 अक्टूबर को मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति काट दी गई थी।
इस पर केंद्र सरकार के वकील आशीष दीक्षित ने कहा कि रेस कोर्स इलाके में चल रहे तोड़फोड़ कार्यों के दौरान सुरक्षा कारणों से यह कदम उठाया गया था।
याचिकाकर्ता और मुस्लिम संगठनों का कहना है कि रेस कोर्स मस्जिद का उल्लेख 1977 के दिल्ली गजट में वक्फ संपत्ति के रूप में है। उनका यह भी दावा है कि मस्जिद को एनडीएमसी के हेरिटेज रजिस्टर में ग्रेड-II हेरिटेज संरचना के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इसी आधार पर उन्होंने कहा है कि इसे हटाने या इसमें बदलाव करने से पहले संबंधित हेरिटेज नियमों का पालन करना जरूरी है।
फिलहाल हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है। केंद्र सरकार ने वक्फ बोर्ड के प्रतिवेदन पर फैसला होने तक मस्जिद को नहीं गिराने का आश्वासन दिया है। मामले में अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी।