

Highlights:
सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी का ADCP वेस्ट ने किया खुलासा
13 लाख रुपये से अधिक देकर भी नौकरी नहीं मिली
उत्तर प्रदेश से राजस्थान तक कई विभागों में भर्ती का झांसा
एक आरोपी गिरफ्तार, सरगना की तलाश में जुटी पुलिस
Government Job scam Agra: सरकारी नौकरी पाने का सपना, प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार असफलता से उपजी निराशा और किसी तरह परिवार की उम्मीदों पर खरा उतरने की बेचैनी… बेरोजगार युवाओं की इसी मजबूरी को साइबर और आर्थिक ठगी करने वाले गिरोह ने कमाई का जरिया बना लिया। नौकरी की तलाश में जुटे युवाओं को सरकारी विभागों में नियुक्ति दिलाने का झांसा दिया जाता था। उनसे लाखों रुपये वसूलने के बाद बाकायदा नियुक्ति पत्र और जॉइनिंग लेटर तक थमा दिए जाते थे। लेकिन जब अभ्यर्थी नौकरी जॉइन करने पहुंचते, तब उन्हें अपने साथ हुई ठगी का अहसास होता था।
आगरा पुलिस कमिश्नरेट के साइबर थाना ने सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले ऐसे ही एक गिरोह का खुलासा किया है। अपर पुलिस उपायुक्त (ADCP) पश्चिमी आदित्य कुमार के अनुसार, इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में सामने आई जानकारी के मुताबिक, गिरोह अब तक करीब 1.25 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है। पुलिस को आरोपी के पास से नौकरी के नाम पर जारी किए गए जॉइनिंग लेटर से संबंधित साक्ष्य भी मिले हैं।
मामले में आगरा निवासी अरविंद कुमार सक्सेना को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया गया था। आरोप है कि उनसे 13 लाख रुपये से अधिक की रकम वसूली गई। नौकरी मिलने की उम्मीद में रकम देने वाले अभ्यर्थी को नियुक्ति पत्र भी जारी किया गया, लेकिन नौकरी जॉइन करने की बारी आई तो कथित फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगीं।
यह मामला उन युवाओं के लिए गंभीर चेतावनी है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के बीच सरकारी नौकरी पाने के लिए किसी भी तरह के अवसर की तलाश में रहते हैं। ठग उनकी इसी उम्मीद का फायदा उठाकर उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं।
ADCP पश्चिमी आदित्य कुमार के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान वीरू शर्मा पुत्र केदारनाथ शर्मा, निवासी रौनक एनक्लेव, टीवी टावर, शमसाबाद रोड, आगरा के रूप में हुई है। उसकी उम्र करीब 34 वर्ष बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ऐसे गिरोह का सदस्य है, जो युवाओं को सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उनसे मोटी रकम वसूलता था।
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, गिरोह उत्तर प्रदेश पुलिस, उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग, उत्तर प्रदेश सचिवालय और उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन में नौकरी दिलाने का झांसा देता था। इसके अलावा राजस्थान के बेसिक शिक्षा विभाग, खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा शिक्षा विभाग में नियुक्ति दिलाने का दावा कर युवाओं को निशाना बनाया जाता था।
इस ठगी का तरीका युवाओं का भरोसा जीतने पर आधारित था। गिरोह के सदस्य नौकरी दिलाने का आश्वासन देने के बाद अभ्यर्थियों से रकम वसूलते और उन्हें नियुक्ति या जॉइनिंग लेटर दे देते थे। कागज मिलने के बाद अभ्यर्थियों को लगता था कि उनकी सरकारी नौकरी पक्की हो गई है। लेकिन संबंधित विभाग में जॉइनिंग की प्रक्रिया के दौरान उन्हें हकीकत का पता चलता था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ पहले से भी कई मामले दर्ज हैं। उसके विरुद्ध जॉइनिंग लेटर उपलब्ध कराने से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य मिलने की बात भी ADCP पश्चिमी ने कही है।
फिलहाल साइबर थाना पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। अब पूरे गिरोह का नेटवर्क खंगाला जा रहा है, ताकि इसके सरगना और अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि उत्तर प्रदेश और राजस्थान के अलावा किन अन्य राज्यों में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से ठगी की गई।
आगरा पुलिस कमिश्नरेट की ओर से साइबर अपराध और आर्थिक धोखाधड़ी के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके बावजूद ठग नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। सरकारी नौकरी के नाम पर सामने आया यह मामला बताता है कि ठगी का शिकार होने से बचने के लिए केवल नियुक्ति पत्र पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया और नियुक्ति की पुष्टि संबंधित विभाग के आधिकारिक माध्यम से अवश्य करनी चाहिए।
सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर निजी व्यक्तियों को लाखों रुपये देने से बचें। किसी भी नियुक्ति पत्र की सत्यता संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत कार्यालय से जांचें।