Highlights:
हजरतगंज थाने पहुंचे मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के कार्यकर्ता
यूथ ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने की FIR दर्ज करने की मांग
श्रीराम और श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना पर मचा बवाल
विवाद बढ़ने पर धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी माफी
Dhirendra Shastri Remarks On Lord Krishna: भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप और उनकी लीलाओं को लेकर कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी पर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मामले में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी विरोध जताया है।
बुधवार को मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के कार्यकर्ता लखनऊ के हजरतगंज थाने पहुंचे और धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ तहरीर देकर FIR दर्ज करने की मांग की। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है, जिससे कृष्ण भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
दरअसल, मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में रामकथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना करते हुए टिप्पणी की थी। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह भगवान श्रीकृष्ण की त्रिभंग मुद्रा का जिक्र करते हुए कहते सुनाई दे रहे हैं कि श्रीकृष्ण तीन जगह से टेढ़े होकर खड़े होते हैं। वह उनकी लचकती कमर, टेढ़ी गर्दन और बांसुरी बजाने का भी उल्लेख करते हैं।
इसके साथ ही उन्होंने भगवान श्रीराम के सीधे खड़े होने और धनुष चलाने की तुलना भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी बजाने की कला से की थी। इस टिप्पणी के बाद संत समाज के कुछ लोगों और कृष्ण भक्तों ने नाराजगी जताई।
इसी टिप्पणी के विरोध में मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के प्रदेश सचिव प्रवेश यादव हजरतगंज कोतवाली पहुंचे और पुलिस को तहरीर सौंपी। प्रवेश यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण पर इस तरह की टिप्पणी कर धीरेंद्र शास्त्री ने अपना नीच परिचय दिया है। भगवान कृष्ण को मानने वाले लोगों की भावनाएं इससे आहत हुई हैं।
उन्होंने पुलिस से मांग की कि धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ FIR दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि धार्मिक मंच से इस तरह की टिप्पणियां करना उचित नहीं है और ऐसे मामलों में पुलिस को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए।
विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर सफाई भी दी थी। उन्होंने कहा था कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के बीच भेद पैदा करना या किसी का अपमान करना उनका उद्देश्य नहीं था। उन्होंने अपनी टिप्पणी को विनोद और भावपूर्ण अभिव्यक्ति बताते हुए कहा कि यदि उनकी बात से किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तो वह क्षमा मांगते हैं।
रिपोर्ट- ईशांक दीक्षित