‘योगी राज रामराज्य नहीं!’ अमित शाह के ‘अंगद के पैर’ वाले बयान पर भड़के शंकराचार्य, दिया करारा जवाब

Swami Avimukteshwaranand: अमित शाह के भाजपा सरकार की स्थिति की तुलना ‘अंगद के पैर’ से करने वाले बयान पर शंकराचार्य ने कहा कि धार्मिक प्रसंगों को राजनीति में अपनी सुविधा अनुसार पेश करना उचित नहीं है।
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती व अमित शाहसोर्स- सोशल मीडिया
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Highlights:

  • अमित शाह के ‘अंगद के पैर’ वाले बयान पर शंकराचार्य ने उठाए सवाल

  • अंगद का पैर सत्ता के अहंकार से नहीं, बल्कि सत्य, धर्म की ताकत से जमा था

  • योगी सरकार की रामराज्य से तुलना पर जताई आपत्ति

Amit Shah Angad Statement: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की स्थिति की तुलना ‘अंगद के पैर’ से करने वाले बयान पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अंगद का पैर सत्ता के अहंकार या राजनीतिक दंभ के कारण नहीं, बल्कि सत्य, धर्म और न्याय की शक्ति के कारण स्थिर था।

शंकराचार्य ने कहा कि अंगद ने रावण की सभा में भगवान श्रीराम की धर्मनीति, सत्य और न्याय के प्रति अपनी अटूट निष्ठा के कारण पैर जमाया था। ऐसे धार्मिक प्रसंगों को राजनीतिक संदर्भ में अपनी सुविधा के अनुसार पेश करना उचित नहीं है।

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धर्मग्रंथों के प्रसंगों का सही अर्थ समझना जरूरी

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि धर्मग्रंथों में बताए गए प्रसंग केवल राजनीतिक भाषणों में इस्तेमाल होने वाले उदाहरण नहीं हैं। इनके पीछे गहरे धार्मिक, नैतिक और सामाजिक संदेश हैं।

उन्होंने कहा कि रावण की सभा में अंगद का पैर धर्म और सत्य की अडिग शक्ति का प्रतीक था, न कि सत्ता या अहंकार का। राजनीतिक दलों और नेताओं को धर्मग्रंथों के प्रसंगों का उल्लेख करते समय उनके वास्तविक अर्थ और संदर्भ को समझना चाहिए। अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार धार्मिक प्रसंगों का इस्तेमाल करना धर्म का सम्मान नहीं, बल्कि उसका अति-सरलीकरण है।

योगी सरकार की रामराज्य से तुलना पर भी जताई आपत्ति

शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की तुलना रामराज्य से किए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "बटुकों की चोटी खींचने, संतों पर निर्ममता से प्रहार करने और लाखों गौमाता को कटवाने वाले शासन की तुलना रामराज्य से कदापि नहीं की जा सकती।"

उन्होंने सवाल किया कि जिस शासन व्यवस्था में संतों और धार्मिक परंपराओं के साथ इस तरह का व्यवहार होने के आरोप हों, उसे भगवान श्रीराम के आदर्श शासन से जोड़ना कैसे उचित हो सकता है?

शंकराचार्य ने कहा कि रामराज्य की अवधारणा सत्य, धर्म, न्याय, करुणा, मर्यादा और लोककल्याण पर आधारित है। भगवान श्रीराम का शासन आदर्श आचरण और जनकल्याण का प्रतीक माना जाता है। इसलिए किसी भी सरकार की तुलना रामराज्य से करने से पहले उसके कामकाज को इन आदर्शों की कसौटी पर परखना चाहिए।

गुजरात रवाना होने से पहले दिया बयान

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ये बातें काशी से गुजरात रवाना होने से पहले अपने प्रवचन के दौरान कहीं। उनके मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसकी जानकारी दी।

अमित शाह के अंगद के पैर वाले बयान पर शंकराचार्य की प्रतिक्रिया से धार्मिक प्रसंगों के राजनीतिक इस्तेमाल और रामराज्य की अवधारणा को लेकर बहस शुरू हो गई है।

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