Kanpur Newborn Missing Case: कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र के निजी अस्पताल से नवजात के गायब होने की शिकायत पुलिस से की गई थी। इस पूरे मामले में नवभारत लाइव के रिपोर्टर ने एक्सक्लूसिव खुलासा किया है। नवभारत के रिपोर्टर के पास एक ऐसा प्रार्थना पत्र हाथ लगा है जिसने पूरे घटनाक्रम पर और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कल्याणपुर थाना क्षेत्र के स्वनक्रीता हॉस्पिटल की डॉक्टर स्वीटी गुप्ता पर सोनी नाम की महिला ने गंभीर आरोप लगाते हुए कल्याणपुर थाने की पुलिस से शिकायत की थी। पीड़ित महिला का आरोप था कि उसके पेट में 25 हफ्ते दो दिन का गर्भ था। प्रसव पीड़ा होने पर वह अस्पताल पहुंची थी। अस्पताल के बाहर ही डिलीवरी होना शुरू हो गई थी। अस्पताल में उसने बच्चे को जन्म दिया था जो उसे दिखाया भी गया था लेकिन इसके बाद डॉक्टर ने उसको नवजात नहीं दिया और उससे कहा गया कि नवजात मर गया था गंगा में बहा दिया गया। इसके बाद पीड़ित सोनी ने डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस से शिकायत की।
नवभारत लाइव ने एक्सक्लूसिव खुलासा करते हुए एक ऐसा प्रार्थना पत्र हासिल कर लिया है जिसने इस पूरे घटनाक्रम पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही साथ पुलिस की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। पीड़ित महिला सोनी ने कल्याणपुर थाने की पुलिस को डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रार्थना पत्र प्रेषित किया था और गंभीर आरोप भी लगाए थे लेकिन अब जो प्रार्थना पत्र सामने आया उसमें यह लिखा है कि 50 हज़ार रुपए में समझौता हो गया है। आखिर यह समझौता किस बात का है ? आखिर समझौते के पीछे के कारण क्या है? पुलिस ने प्रार्थना पत्र पर कार्रवाई क्यों नहीं की?
क्या समझौता हो जाने से क्राइम खत्म हो जाता है? इन सब तमाम सवालों ने पुलिस की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है लेकिन सवाल फिर भी वही है कि आखिर नवजात गया कहां? क्योंकि अगर नवजात जिंदा था तो परिजनों के सुपुर्द क्यों नहीं किया गया? पीड़ित महिला ने इसी की शिकायत पुलिस से की थी और यदि नवजात की मौत भी हो गई थी तो भी उसके माता-पिता के सुपुर्द क्यों नहीं किया गया। जीवित या मृत किसी भी अवस्था में आखिर नवजात है तो है कहां?
इस पूरे घटनाक्रम ने बच्चा चोरी के बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा कर दिया है क्या ऐसा तो नहीं कि नवजात को बेच दिया गया हो? क्योंकि अगर वाकई में नवजात की मृत्यु हो गई थी और उसके शव को इसलिए डिस्पोज कर दिया गया था कि उसकी मां और पिता उसके शव को डिस्पोज करने में सक्षम नहीं थे तो फिर अस्पताल द्वारा पीड़ित महिला को 50 हज़ार रुपए किस बात के दिए गए? 50 हज़ार रुपए देना और कानपुर पुलिस के समक्ष प्रार्थना पत्र देते हुए उसमें यह लिखना की 50 रुपए में समझौता हो गया है। यह कहीं ना कहीं नवजात के सौदे की ओर इशारा कर रहा है। साथ ही पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते है।