करवा चौथ पर छत से गिरने से महिला की मौत
सोलह शृंगार कर पूजा के लिए छत पर पहुंची थी महिला
6 साल के मासूम के सिर से उठा मां का साया
Woman Died Karwa Chuth: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में करवा चौथ के दिन महिला की मौत हो गई। दिनभर पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए निर्जला व्रत रखा। फिर शाम के वक्त वह व्रत खोलने के लिए चांद देखने के लिए छत पर गई। इसी दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और पैर फिसलने से वह छत से नीचे गिर गई, जिससे उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद महिला को गंभीर हालत में परिजन सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतका की पहचान आरती के नाम से हुई है।
जानकारी के मुताबिक, हमीरपुर के लालपुर थाना क्षेत्र के रूरीपारा गांव में आरती अपने पति नीतेश द्विवेदी, सास और देवरानी के साथ रहती थी। करवा चौथ के मौके पर आरती ने अपने पति की लंबी उम्र के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखा था। उसने दिनभर बिना कुछ खाए-पिए व्रत का पालन किया।
शाम को पूजा की तैयारियों के तहत आरती ने सोलह शृंगार किया। इसके बाद वह अपनी सास और देवरानी के साथ पूजा करने के लिए घर की छत पर पहुंची। परिवार में त्योहार को लेकर खुशी का माहौल था। सभी को चांद निकलने का इंतजार था, ताकि पूजा की रस्म पूरी की जा सके और आरती अपना व्रत खोल सके।
लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पलों में यह खुशी मातम में बदल जाएगी। छत पर मौजूद रहने के दौरान अचानक आरती का संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर गई और बेहोश हो गई।
आरती को छत से गिरता देखकर परिवार के लोग घबरा गए। परिजन आनन-फानन में उसे बेहोशी की हालत में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उसकी जांच की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद आरती को मृत घोषित कर दिया।
डॉक्टरों की ओर से मौत की पुष्टि होते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस घर में करवा चौथ की पूजा की तैयारियां चल रही थीं, वहां चीख-पुकार मच गई। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
हादसे ने सबसे बड़ा दुख आरती के छह साल के बेटे को दिया है। जिस उम्र में बच्चे को मां के प्यार, दुलार और देखभाल की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसी उम्र में उसके सिर से मां का साया हमेशा के लिए उठ गया।
करवा चौथ का दिन आमतौर पर पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और साथ का प्रतीक माना जाता है। इस दिन आरती ने भी अपने पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखा था। उसने सोलह शृंगार किया और पूजा के लिए छत पर पहुंची, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।