डॉ. बबीता सिंह चौहान ने सुनीं 100 महिलाओं की फरियाद
पुलिस को संवेदनशीलता के साथ समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश
बोलीं- गलत रिश्ते की सजा पूरी जिंदगी बेटी को नहीं भुगतनी चाहिए
Agra Domestic Violence Complaints: उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और सम्मान के लिए मिशन शक्ति अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस भी महिला अपराधों की रोकथाम और पीड़ित महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार कार्रवाई का दावा कर रही है, लेकिन घरेलू हिंसा के मामले इस अभियान के जमीनी असर पर सवाल खड़े कर रहे हैं। आगरा के नवीन सर्किट हाउस में आयोजित राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई में सबसे अधिक शिकायतें घरेलू हिंसा से जुड़ी पहुंचीं। यह स्थिति बताती है कि जागरूकता और सरकारी प्रयासों के बावजूद महिलाओं को घर की चारदीवारी के भीतर प्रताड़ना से पूरी तरह राहत नहीं मिल पा रही है।
राज्य महिला आयोग उत्तर प्रदेश की अध्यक्ष डॉ.बबीता सिंह चौहान ने शुक्रवार को नवीन सर्किट हाउस में महिला जनसुनवाई की। इस दौरान कुल 100 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, गुजारा भत्ता और पेंशन से संबंधित मामले प्रमुख रहे। घरेलू हिंसा की शिकायतों
की संख्या सामने आने पर आयोग की अध्यक्ष ने भी चिंता जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और थानाध्यक्षों से दूरभाष पर बात कर मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ बबीता चौहान ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि कई मामले मेरे पास ऐसे भी आते हैं जिनमें पुलिस ऐसे मामले को अपने स्तर से भी निपटारा करा सकती है, ऐसे मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली संदेह एवं सवालों के घेरे में है।
सवाल यह भी है कि यदि थानों पर ही पीड़ित महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना जाए तथा समय से कार्रवाई हो तो क्या उन्हें अपनी फरियाद लेकर महिला आयोग तक पहुंचने की जरूरत पड़ेगी? मिशन शक्ति के तहत महिला सुरक्षा के प्रयासों के बीच पुलिस के व्यवहार और शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की जरूरत दिखाई दे रही है।
डॉ. बबीता सिंह चौहान ने पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि महिला उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों को सामान्य विवाद समझकर नजरअंदाज न किया जाए। पीड़ित महिलाओं की बात सम्मानपूर्वक सुनी जाए और प्रत्येक मामले में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पुलिसकर्मियों से अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने की अपील करते हुए कहा कि थानों पर सम्मानजनक व्यवहार ही पीड़ित महिलाओं को बड़ी राहत दे सकता है।
घरेलू हिंसा के मामलों पर उन्होंने परिवारों की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बेटी के ससुराल में प्रताड़ना हो रही है तो उसके मायके वालों को सामाजिक दबाव में उसे दोबारा उसी माहौल में भेजने के बजाय उसका साथ देना चाहिए। किसी गलत रिश्ते की सजा बेटी को पूरी जिंदगी नहीं भुगतनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हर पारिवारिक विवाद में बिना पूरी बात समझे निर्णय लेना उचित नहीं है। परिवारों को आपसी संवाद और समझदारी से विवाद सुलझाने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने विवाह से पहले युवक-युवतियों और उनके अभिभावकों की काउंसलिंग पर जोर देते हुए कहा कि आपसी समझ, संवाद और पारिवारिक सामंजस्य बेहद जरूरी हैं। महिला सुरक्षा और घरेलू हिंसा की रोकथाम केवल पुलिस की नहीं, बल्कि परिवार और समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है।
अध्यक्ष ने कहा कि महिला आयोग में आने वाले प्रत्येक प्रार्थना पत्र का शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित कराया जाएगा। विगत जनसुनवाई के लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कर एक सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट आयोग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की समीक्षा करते हुए महिलाओं को स्वरोजगार प्रशिक्षण से जोड़ने और सरकारी योजनाओं का प्रभावी प्रचार-प्रसार करने को भी कहा।
जनसुनवाई में एसडीएम नरेंद्र गंगवार, एसीपी सुनीता चौहान, डिप्टी सीएमओ डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति, जिला कौशल प्रबंधक अमित धाकरे, सहायक श्रमायुक्त शगुन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।