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विशाखापट्टनम स्थित इस्कॉन मंदिर में मैकेनिकल हाथी रंगा पेश किया गया है।
मैकेनिकल हाथी रंगा PETA इंडिया ने इसे मंदिर को भेंट किया है।
रंगा को विशाखापट्टनम के श्री राधा दामोदर मंदिर को भेंट किया गया है।
रंगा का वीडियों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
Visakhapatnam ISKCON Temple: आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित इस्कॉन मंदिर में तकनीक और धार्मिक परंपरा का अनोखा मेल देखने को मिला है। यहां राज्य का पहला आदमकद मैकेनिकल हाथी रंगा पेश किया गया है। वहीं अभिनेता अदिवी शेष और पशु अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था PETA इंडिया ने इसे मंदिर को भेंट किया है। जिसमें 25 अक्टूबर 2026 को शरद पूर्णिमा के अवसर पर इसका अनावरण हुआ। वहीं इसमें खास बात यह है कि इस पहल का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों में जीवित हाथियों के इस्तेमाल के बजाय एक यांत्रिक विकल्प उपलब्ध कराना है।
रंगा को विशाखापट्टनम के श्री राधा दामोदर मंदिर को भेंट किया गया है जो इस्कॉन से जुड़ा है। PETA इंडिया ने इसको लेकर बताया है कि यह पहल मंदिर के उस फैसले के अनुरूप है जिसके तहत वह जीवित हाथियों को रखने या किराये पर लेने के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था अपनाना चाहता है।
इस कदम के जरिए धार्मिक परंपराओं को जारी रखते हुए पशुओं के प्रति संवेदनशीलता को भी महत्व देने की कोशिश की गई है। वहीं अदिवी शेष ने भी इस पहल को दूसरे मंदिरों के लिए प्रेरणादायक बताया।
रंगा का अनावरण इस्कॉन के गवर्निंग बॉडी कमीशन के अध्यक्ष एच. जी. मधुसेविता प्रभु ने किया। इस मौके पर मंदिर के अध्यक्ष एच. जी. सांबा दास आध्यात्मिक मार्गदर्शक डॉ. निताइसेविनी माताजी और श्रद्धालु मौजूद रहे। उद्घाटन के बाद भजन और धार्मिक शोभायात्रा भी आयोजित की गई। इस आयोजन ने श्रद्धालुओं के सामने एक ऐसा विकल्प पेश किया जिसमें धार्मिक उत्सव का पारंपरिक स्वरूप बनाए रखते हुए जीवित हाथी पर निर्भरता कम की जा सकती है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि रंगा करीब 3 मीटर ऊंचा और 500 किलोग्राम वजनी है। इसे रबर, फाइबर, धातु, फोम और स्टील जैसी सामग्रियों से बनाया गया है। इसमें पांच मोटर लगी हैं जिनकी मदद से यह सिर हिला सकता है, कान और आंखें चला सकता है, पूंछ घुमा सकता है और सूंड उठा सकता है। इसमें पानी छिड़कने की सुविधा भी दी गई है। यह बिजली से चलता है और पहियों वाले आधार पर लगा है जिससे इसे शोभायात्रा में ले जाना संभव है।
धार्मिक उत्सवों में जीवित हाथियों के इस्तेमाल को लेकर पशु कल्याण और लोगों की सुरक्षा से जुड़े सवाल उठते रहे हैं। कैद में रहने वाले हाथियों को पैरों की समस्या, घाव और अनुचित देखभाल जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं तनाव या भय की स्थिति में हाथी लोगों के लिए भी खतरा बन सकते हैं।
ऐसे में रंगा जैसे मैकेनिकल विकल्प मंदिरों को उत्सवों की परंपरा बनाए रखने का एक दूसरा रास्ता देते हैं। लेकिन इसका व्यापक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि दूसरे मंदिर ऐसी व्यवस्था अपनाते हैं या नहीं। फिलहाल विशाखापट्टनम की यह पहल तकनीक के इस्तेमाल के साथ पशु कल्याण को महत्व देने की एक उल्लेखनीय मिसाल है।