पुणे IISER लाइब्रेरी में मिली दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद की किताब, विवाद के बाद इंस्टीट्यूट ने हटाई

Umar Khalid Book Controversy: पुणे स्थित केंद्र सरकार के IISER संस्थान की लाइब्रेरी में उमर खालिद की किताब मिलने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। सोशल मीडिया पर विरोध के बाद किताब को हटा लिया गया है।
Pune IISER Library Umar Khalid Book Controversy
पुणे में लाइब्रेरी में उमर खालिद की बुक का डिस्प्लेसोर्स: सोशल मीडिया
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Highlights

  • पुणे की IISER लाइब्रेरी में खालिद की किताब शामिल।

  • साइंस इंस्टीट्यूट की श्रीनिवास रामानुजन लाइब्रेरी केंद्र सरकार के अंतर्गत आती है।

  • सोशल मीडिया पर विरोध के बाद संस्थान प्रशासन ने किताब को वापस लिया।

Pune IISER Library Umar Khalid Book Controversy: महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित केंद्र सरकार के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) से एक बड़ा विवाद सामने आया है। संस्थान की श्रीनिवास रामानुजन लाइब्रेरी में दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद की Ph.D रिसर्च पर आधारित किताब को शामिल किया गया था। इसे लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न वर्गों ने कड़ी आपत्ति जताई विरोध किया। बढ़ते विवाद और विरोध प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने इस किताब को लाइब्रेरी से वापस ले लिया है।

क्या है विवाद और कौन सी है उमर खालिद की किताब?

मिली जानकारी के मुताबिक, जिस किताब को लेकर विवाद खड़ा हुआ है उसका नाम 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज: आदिवासी हिस्ट्रीज एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर' है। यह किताब मूल रूप से झारखंड के सिंहभूम इलाके के आदिवासी समुदाय के इतिहास, ब्रिटिश शासन काल के प्रशासनिक ढांचे और आदिवासियों के बीच सत्ता व सामाजिक संबंधों पर आधारित एक विस्तृत शोध अध्ययन है।

उमर खालिद ने अपना यह रिसर्च वर्क (थीसिस) वर्ष 2018 में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज में सबमिट किया था। इस शोध पत्र के आधार पर ही उन्हें वर्ष 2019 में जेएनयू से Ph.D की डिग्री प्रदान की गई थी।

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सोशल मीडिया पर विरोध के बाद उठाया गया कदम

जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई कि केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित इस साइंस और रिसर्च इंस्टीट्यूट की लाइब्रेरी में दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद की शोध पर आधारित पुस्तक रखी गई है, सोशल मीडिया पर नेटिजन्स और विभिन्न संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। उपयोगकर्ताओं ने सरकारी संस्थान की लाइब्रेरी में इस प्रकार की पुस्तक की मौजूदगी पर सवाल उठाए। विवाद बढ़ता देख लाइब्रेरी प्रशासन ने मामले को शांत करने के लिए किताब को अलमारियों से हटा दिया है।

JNU और जामिया कैंपस में भी गरमाया माहौल

पुणे विवाद से एक दिन पहले राजधानी दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) कैंपस की दीवारों पर 'उमर खालिद को रिहा करो' और 'नक्सलबाड़ी जिंदाबाद' जैसे नारे लिखे जाने की खबरें आई थीं।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने JNU की वामपंथी छात्र संस्थाओं पर आरोप लगाया है कि वे कैंपस का माहौल खराब करने के लिए इस तरह के देशविरोधी और आपत्तिजनक नारे लिख रहे हैं। ABVP का यह भी दावा है कि स्वतंत्रता सेनानी वीडी सावरकर के चित्र के पास भी आपत्तिजनक टिप्पणियां उकेरी गई हैं।

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कौन है उमर खालिद और जेल में क्यों है बंद?

उमर खालिद फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों की कथित साजिश रचने और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के आरोप में तिहाड़ जेल जेल में बंद है। उमर खालिद को दिल्ली दंगों की कथित साजिश के आरोप में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जेल में बंद रखा गया है। उमर खालिद मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले हैं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से अपनी पढ़ाई की। वह पूर्व छात्र नेता और पूर्व शोधकर्ता हैं।

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