Rural Inflation Impact India: देश का मध्यम व गरीब वर्ग बुरी तरह महंगाई की मार न झेलने को मजबूर है। अगस्त में खुदरा महंगाई दर 4.82 प्रतिशत पर जा पहुंची है जो कि जुलाई में 4.45 प्रतिशत पर थी। खाद्यान्न के दाम 5.95 प्रतिशत बढ़े हैं जबकि थोक महंगाई दर 9.92 फीसदी तक जा पहुंची है।
इसमें ग्रामीण क्षेत्र की महंगाई 5.23 प्रतिशत व शहरी क्षेत्र की 4.31 प्रतिशत है। तात्पर्य यह है कि ग्रामीण इलाकों पर महंगाई का असर ज्यादा है। ग्रामीण अर्थव्यस्था कृषि, मजदूरी तथा अनिश्चित रोजगार पर निर्भर रहती है। वहां लोगों को गुजर-बसर के लिए अधिक संघर्ष करना पड़ता है।
सब्जी, प्याज, खाद्य तेल, किराणा, ईंधन के दाम बढ़ने से निम्न, मध्यम और गरीब वर्ग मध्यम और गरीब वर्ग की मुश्किलें बढ़ी हैं। जीवनावश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ने से पोषण व स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ता है।
ऐसी स्थिति में मकान का किराया, बिजली बिल, पेट्रोल-डीजल, बच्चों की फीस, औषधियों, प्रवास तथा रोजाना खर्च के लिए जुगाड़ करना कठिन हो जाता है। वेतन वृद्धि वर्ष में एक बार होती है। वह भी हर व्यक्ति के नसीब में नहीं है। दूसरी ओर बाजार में वस्तुओं के भाव रोज बदलते चले जाते हैं।
ऐसी हालत में खर्च ही पूरा नहीं पड़ता तो बचत कहां से होगी? महंगाई की वजह से लोग कर्ज या बीमे की किश्त भी नहीं चुका पाते। थोक महंगाई दर 10 फीसदी के आसपास पहुंचना चिंताजनक है। जब कच्चा माल, ऊर्जा, परिवहन महंगा होने से उत्पादन खर्च बढ़ जाए तो उद्योग क्षेत्र उस महंगाई को उपभोक्ता वर्ग पर डाल देता है।
विश्व की अशांत स्थितियों से भी महंगाई बढ़ी है। क्रूड ऑइल के दाम बढ़ने से ईंधन महंगा है। खाद्य तेल के दाम भी काफी बढ़ गए हैं। इस बार कमजोर मानसून की वजह से सारी उम्मीदें टूट गईं। यदि कृषि उत्पादन में गिरावट आई तो अनाज व सब्जियां और महंगे हो सकते हैं।
जिन लोगों ने घर कर्ज, वाहन कर्ज या उद्योग के लिए कर्ज ले रखा है, उन्हें ईएमआई भरने में दिक्कतें जा रही है। ऐसी विषम परिस्थिति में जमाखोरी रोकना, आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करना तथा बाजार में कृत्रिम अभाव को दूर करना आवश्यक है। खुदरा बाजार की दरों पर नजर रखते हुए सार्वजनिक वितरण व्यवस्था को मजबूत करना होगा।
राशन के अनाज में अनियमितता और गोलमाल होता आया है जिस पर कड़ी निगरानी रखनी होगी। आवश्यक वस्तुओं की उचित दाम पर उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है। सभी जानते हैं कि महंगाई एक बार बढ़ना शुरू होती है तो कम नहीं होती इसलिए ऐसे उपाय करने होंगे कि लोगों को रोजगार मिले और उनकी क्रयशक्ति बढ़े। ग्रामीण क्षेत्रों में जीरामजी योजना में कार्यदिवस बढ़ाए जाएं तो गरीब जनता को राहत मिल सकती है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा