अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी (अजित पवार गुट) में नेतृत्व और प्रभाव को लेकर असंतोष बताया जा रहा है।
प्रफुल्ल पटेल समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने अमित शाह से मुलाकात की।
पार्थ पवार की भूमिका, पार्टी में नियुक्तियों और सामूहिक नेतृत्व की कमी पर सवाल उठे हैं।
बीजेपी में विलय और शरद पवार गुट से एकजुटता की संभावनाओं पर भी चर्चा की अटकलें हैं।
Sunetra Pawar NCP Leadership Dispute: माना जा रहा है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजीत पवार) गुट के वरिष्ठ नेता पार्टी में अपनी उपेक्षा और हाशिये पर डाले जाने से परेशान महसूस कर रहे हैं और वह बीजेपी के साथ विलय के पक्ष में हैं। आखिर क्या वजह है कि सुनेत्रा और पार्थ पवार के बिना इस गुट के सीनियर नेता प्रफुल पटेल व सुनील तटकरे के नेतृत्व में छगन भुजबल, धनंजय मुंडे, हसन मुश्रीफ और दिलीप वलसे पाटिल दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिले? जब तक अजीत पवार जीवित थे उनका राज्य सरकार में अच्छा-खासा प्रभाव था, लेकिन इसके बाद यद्यपि सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन वित्त मंत्रालय नहीं दिया गया, एकनाथ शिंदे अधिक ताकतवर हो गए।
शिंदे गुट के नेतृत्व वाले मंत्रालयों में राकों नेताओं के काम नहीं हो पा रहे हैं। आम जनता से जुड़े काम भी अटके पड़े हैं, जिसका असर हाल ही में हुए विधानपरिषद चुनावों में देखने को मिला। हाल ही में सुनेत्रा पवार ने बृजमोहन श्रीवास्तव को हटाकर उनकी जगह उमेश पाटिल को पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया। इसके चाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने शाह से मुलाकात की।
ये नेता इस बात से नाराज हैं कि पार्थ पवार पार्टी में मनमानी कर रहे हैं और उनकी मां सनेत्रा पवार ने उन्हें इसकी छूट दे रखी है। महत्वपूर्ण फैसलों में पार्थ पवार इन नेताओं की राय नहीं लेते। पार्टी में सामूहिक नेतृत्व का अभाव है। हाल ही पार्टी में किए गए फेरबदल व प्रमुख नियुक्तियों को लेकर असंतोष बढ़ा है।
गत सप्ताह विधानपरिषद चुनाव में पार्टी की पराजय के बाद प्रफुल पटेल ने आत्मावलोकन करने व संगठनात्मक ढांचे में सुधार पर जोर दिया था। उन्होंने सुनेत्रा के नेतृत्व और पार्टी संचालन को लेकर सवाल भी उठाए थे। अमित शाह के साथ मुलाकात के बाद पटेल, तटकरे व अन्य नेताओं ने छगन भुजबल के घर में बैठक की। इसमें भी सुनेत्रा व पार्थ नहीं थे। यह भी माना जाता है कि इन नेताओं ने शरद पवार की राकां के साथ विलय की संभावना पर भी विचार किया।
चीजेपी इस मामले में सतर्कता से विचार कर रही है। क्योंकि वह महाराष्ट्र में अपने पार्टी कैडर और पुराने नेताओं को परेशानी में डालना नहीं चाहती। पार्टी में किसी भी तरह के असंतोष को छिपाने के लिए सभी सीनियर नेताओं ने मुंबई की कोर कमेटी में सुनेत्रा पवार को अमित शाह के साथ हुई बैठक के बारे में सफाई दी।
सुनेत्रा ने उन्हें कड़ी चेतावनी दी कि पार्टी उनके हिसाब से ही चलेगी तथा भविष्य में दिल्ली जाकर इस तरह की मीटिंग करने से पहले उन्हें पूरी जानकारी दी जाए, तटकरे ने बताया कि पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पार्टी संगठन को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। पार्टी में नियुक्तियों को लेकर विस्तार से सौहार्दपूर्ण माहौल में चचर्चा हुई तथा पार्टी के दोनों गुटों में विलय का मुद्दा पहले ही सखत्म हो चुका है। अब मुद्दा यह है कि यदि इन वरिष्ठ नेताओं को सुनेत्रा व पार्थ पवार से कोई शिकायत नहीं है, तो वह अमित शाह से मिलने क्यों गए थे?
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा