मां गौरी (सौ.AI)
धर्म

सावन के तीसरे मंगलवार पर बन रहा खास मौका, मां गौरी को अर्पित करें ये चीजें, विवाह की हर बाधा होगी दूर

Sawan Mangalwar: सावन के तीसरे मंगलवार का दिन मां गौरी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन मां गौरी को कुछ खास चीजें अर्पित करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होने की मान्यता है।

सीमा कुमारी

Maa Gauri Worship : 18 अगस्त 2026 मंगलवार को सावन माह का तीसरा मंगला गौरी व्रत रखा जा रहा है। सावन माह में पड़ने वाले हर मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत का विधान होता है। इस व्रत को सुहागिन अपने पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखतीं है, वहीं कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत रखती है।

तीसरे मंगला गौरी व्रत पर शुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:05 बजे से लेकर 12:56 बजे तक ।

  • अमृत काल - रात 09:18 बजे से लेकर 11:01 बजे तक ।

  • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04:32 बजे से लेकर सुबह 05:20 बजे तक ।

मंगला गौरी व्रत पूजा विधि

मंगला गौरी व्रत करने वाली महिलाओं और कन्याओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ वस्त्र पहनने चाहिए।

इसके बाद माता पार्वती और शिव जी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें । मंगला गौरी व्रत के पूजन के लिए पूजा स्थान की सफाई कर लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।

इसके बाद माता पार्वती और शिव जी की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान की प्रतिमा के समक्ष दीप और धूप जलाएं. माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। फल और मिठाई का भोग लगाएं और आरती कर पूजा संपन्न करें ।

विवाह में रुकावट दूर करने का उपाय

16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें

अगर विवाह में लगातार अड़चनें आ रही हैं तो मंगला गौरी व्रत के दिन मां गौरी की श्रद्धापूर्वक आराधना करें। इस दिन 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करना शुभ माना जाता है।

'ॐ गौरीशंकराय नमः' मंत्र जाप करें

इसके बाद 'ॐ गौरीशंकराय नमः' मंत्र का 21 या 108 बार जाप करें। मान्यता है कि इससे विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने की कामना की जा सकती है। इसके अलावा 5 या 7 कन्याओं को घर बुलाकर प्रेमपूर्वक भोजन कराएं।

मंगल दोष से राहत के लिए करें ये काम

नीम के पेड़ की श्रद्धापूर्वक पूजा करें

कुंडली में मंगल की प्रतिकूल स्थिति होने पर मंगला गौरी व्रत के दिन देवी की पूजा के साथ मंगल से जुड़े उपाय किए जा सकते हैं। तीसरे मंगलवार को दक्षिण दिशा में नीम का पौधा लगाने की परंपरा बताई जाती है। यदि पौधा लगाना संभव न हो तो नीम के पेड़ की श्रद्धापूर्वक पूजा करें। सुबह और शाम उसके नीचे दीपक जलाकर जल अर्पित कर सकते हैं।

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