Varalakshmi Vrat 2026: धन-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए कब रखें वर लक्ष्मी व्रत? जानें पूजा मुहूर्त और विधि

Varalakshmi Puja: यह व्रत मां लक्ष्मी के वरलक्ष्मी स्वरूप को समर्पित है। इस दिन धनप्राप्ति के लिए कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं। इस व्रत का पालन करने से सुख समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
Varalakshmi vrat 2026 date puja muhurat vidhi
वर लक्ष्मी व्रत फोटो.एआई
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Varalakshmi Vrat: हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। मां लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है। वरलक्ष्मी व्रत मां लक्ष्मी के वरलक्ष्मी स्वरूप को समर्पित है। देवी के इस स्वरूप की उपासना करने से सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

श्रावण महीने के आखिरी शुक्रवार को वरलक्ष्मी व्रत रखा जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी के वरलक्ष्मी स्वरूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां वरलक्ष्मी अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसी वजह से इस स्वरूप को ‘वर + लक्ष्मी’, यानी वरदान देने वाली मां लक्ष्मी कहा जाता है।

खासतौर पर विवाहित महिलाएं परिवार और पति की सुख-समृद्धि एवं मंगलकामना के लिए यह व्रत रखती हैं। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में वरलक्ष्मी व्रत विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इन राज्यों में मुख्य रूप से विवाहित महिलाएं पति और परिवार के अन्य सदस्यों की खुशहाली के लिए मां वरलक्ष्मी की पूजा करती हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, वरलक्ष्मी की पूजा करना अष्टलक्ष्मी की पूजा के समान माना जाता है। अष्टलक्ष्मी में धन (श्री), पृथ्वी (भू), विद्या (सरस्वती), प्रेम (प्रीति), यश (कीर्ति), शांति, संतोष (तुष्टि) और शक्ति (पुष्टि) का प्रतिनिधित्व करने वाले देवी स्वरूप शामिल होती हैं।

कब है वरलक्ष्मी व्रत?

पंचांग के अनुसार, सावन का आखिरी शुक्रवार 28 अगस्त 2026 को है। इसी दिन वरलक्ष्मी व्रत रखा जाएगा। इस दिन सावन महीने का समापन भी होगा। वरलक्ष्मी पूजा के लिए स्थिर लग्न को शुभ माना जाता है। सुबह का ब्रह्म मुहूर्त और दोपहर का अभिजीत मुहूर्त भी पूजा-पाठ के लिए शुभ होते हैं। हालांकि स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय अलग हो सकता है।

  • सिंह लग्न पूजा मुहूर्त: सुबह 5:57 बजे से 7:29 बजे तक

  • वृश्चिक लग्न पूजा मुहूर्त: दोपहर 12:05 बजे से 2:23 बजे तक

  • कुंभ लग्न पूजा मुहूर्त: शाम 6:09 बजे से 7:37 बजे तक

  • वृषभ लग्न पूजा मुहूर्त: रात 10:37 बजे से 12:33 बजे तक, 29 अगस्त

2026 में बन रहा है खास संयोग

आमतौर पर वरलक्ष्मी व्रत श्रावण शुक्ल पक्ष के आखिरी शुक्रवार को रखा जाता है और यह श्रावण पूर्णिमा से कुछ दिन पहले आता है। लेकिन 2026 में वरलक्ष्मी व्रत और श्रावण पूर्णिमा एक ही दिन, 28 अगस्त को पड़ रहे हैं। इसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार भी माया जाएगा।

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कैसे करें पूजा?

  • वरलक्ष्मी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थल की सफाई करके वहां कलश स्थापित करें और मां लक्ष्मी की पूजा करें।

  • मां को फूल, फल, मिठाई और दीपक अर्पित करें। इसके बाद वरलक्ष्मी व्रत कथा पढ़ना या सुनना शुभ माना जाता है। शाम की आरती के बाद प्रसाद ग्रहण करें।

  • पूरे दिन सात्विक भोजन करने की परंपरा है। पूजा में श्रद्धा और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।

वरलक्ष्मी पूजा की विधि काफी हद तक दिवाली की महालक्ष्मी पूजा जैसी होती है। हालांकि इसमें दोरक और वायन से जुड़े मंत्र और पूजा की विशेष प्रक्रिया शामिल करने से जीवन में धन-समृद्धि बनी रहती है। पूजा के दौरान बांधा जाने वाला पवित्र धागा दोरक कहलाता है, जबकि मां वरलक्ष्मी को चढ़ाई जाने वाली मिठाई या विशेष भेंट को वायन कहा जाता है।

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