

Mangla Gauri Vrat Katha Hindi: आज सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत रखा जा रहा है। यह व्रत सावन के हर मंगलवार को रखा जाता है। इस दिन मां पार्वती के स्वरूप मां मंगला गौरी की पूजा होती है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को सुहागिन महिलाए अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती है।
धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, इस दिन व्रत रखने से कन्याओं योग्य वर और सुहागिन स्त्रियों को सुखमय वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही मां पार्वती भी अपनी कृपा बनाए रखती है। वही ,माता मंगला गौरी की पूजा में कथा का श्रवण जरूर करना चाहिए करें। इसके बिना व्रत पूजन अधूरा माना जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक नगर में धर्मपाल नाम के एक धनी सेठ अपनी पत्नी के साथ रहते थे। उनके पास धन-धान्य, वैभव और सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी, लेकिन संतान न होने के कारण उनका जीवन अधूरा था। दोनों पति-पत्नी प्रतिदिन देवी-देवताओं की पूजा करते और संतान प्राप्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते थे।
एक दिन एक साधु उनके द्वार पर भिक्षा मांगने आए। सेठानी ने बड़े आदर-सत्कार के साथ उनका स्वागत किया। साधु ने कहा कि उनके भाग्य में संतान का सुख नहीं लिखा है। यह सुनकर दोनों अत्यंत दुखी हो गए और साधु के चरणों में गिरकर उपाय पूछने लगे। तब साधु ने उन्हें श्रद्धा, संयम और पूर्ण विश्वास के साथ मां मंगला गौरी का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जो भक्त सच्चे मन से यह व्रत करता है, उस पर मां मंगला गौरी अवश्य प्रसन्न होती हैं।
साधु के निर्देशानुसार धर्मपाल सेठ और उनकी पत्नी ने श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखना शुरू किया। वे प्रातः स्नान करके मां गौरी की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित करते, लाल पुष्प अर्पित करते, सुहाग की सामग्री चढ़ाते और विधि-विधान से पूजा करते। इसके साथ ही वे निर्धनों को भोजन कराते और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य भी करते रहे।
कुछ समय बाद मां मंगला गौरी उनकी भक्ति और निष्ठा से प्रसन्न हुईं। देवी ने स्वप्न में दर्शन देकर आशीर्वाद दिया कि शीघ्र ही उनके घर एक तेजस्वी पुत्र का जन्म होगा।
कुछ समय बाद उनके घर पुत्र का जन्म हुआ। पूरे नगर में हर्ष और उत्सव का वातावरण छा गया। सभी ने इसे मां मंगला गौरी की असीम कृपा माना।
समय बीतने पर पुत्र बड़ा हुआ और उसका विवाह एक सुशील एवं गुणवान कन्या से हुआ। विवाह के कुछ समय बाद एक ज्योतिषी ने भविष्यवाणी की कि युवक के जीवन पर अल्पायु का संकट मंडरा रहा है।
यह सुनकर पूरा परिवार चिंतित हो गया, लेकिन उसकी पत्नी ने धैर्य नहीं खोया। उसने अटूट विश्वास के साथ प्रत्येक मंगलवार मां मंगला गौरी का व्रत करना शुरू किया और अपने पति की दीर्घायु के लिए नियमित प्रार्थना करने लगी।
एक रात जब युवक के जीवन पर बड़ा संकट आने वाला था, तब मां मंगला गौरी ने स्वप्न में बहू को संकेत दिया कि वह सावधानी बरते। देवी की कृपा से संकट टल गया और युवक का जीवन सुरक्षित बच गया। परिवार ने इसे मां मंगला गौरी की अनंत कृपा और व्रत की महिमा माना।
मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ मंगला गौरी व्रत करता है, व्रत कथा का श्रवण करता है तथा मां गौरी की आराधना करता है, उसके वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। मां की कृपा से परिवार पर आने वाले संकट दूर होते हैं, पति की आयु में वृद्धि होती है तथा घर में सुख, शांति और सौभा