Narasimha Avatar Of Lord Vishnu: हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को सृष्टि के पालनहार के रूप में माना जाता है। उन्होंने समय-समय पर अलग-अलग अवतार लेकर धरती पर धर्म की रक्षा की है। हर अवतार का अपना एक उद्देश्य रहा है, लेकिन जब बात सबसे खतरनाक या सबसे प्रचंड अवतार की आती है, तो विद्वान एक ही नाम पर सहमत नजर आते हैं नरसिंह अवतार।
नरसिंह अवतार आधा मनुष्य और आधा सिंह का रूप था। यह रूप यूं ही नहीं लिया गया था, बल्कि इसके पीछे एक खास कारण था। असुर राजा हिरण्यकशिपु को ऐसा वरदान मिला था कि वह न दिन में मरेगा, न रात में, न किसी मनुष्य से, न किसी पशु से, न धरती पर, न आकाश में, और न ही किसी अस्त्र या शस्त्र से। इस वरदान के कारण वह खुद को अजेय मानने लगा और उसने खुद को भगवान घोषित कर दिया। इतना ही नहीं, उसने अपने ही पुत्र प्रह्लाद को भी सताना शुरू कर दिया, क्योंकि वह विष्णु का परम भक्त था।
जब अत्याचार अपनी सीमा पार कर गया, तब भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण किया। उन्होंने हिरण्यकशिपु का वध संध्या समय (न दिन, न रात), चौखट पर (न धरती, न आकाश) और अपने नाखूनों से (न अस्त्र, न शस्त्र) किया। यह घटना सिर्फ एक युद्ध नहीं थी, बल्कि यह संदेश था कि ईश्वर का न्याय किसी भी चालाकी या अहंकार से बड़ा होता है।
नरसिंह अवतार की खतरनाक छवि सिर्फ उनके भयानक रूप के कारण नहीं है, बल्कि उनके असीम क्रोध के कारण भी है। कहा जाता है कि हिरण्यकशिपु का वध करने के बाद भी उनका क्रोध शांत नहीं हुआ था और देवता तक भयभीत हो गए थे। अंततः भक्त प्रह्लाद की सच्ची भक्ति और समर्पण ने ही भगवान नरसिंह को शांत किया।
भगवान विष्णु के अन्य अवतार भी अपने-अपने तरीके से प्रचंड माने जाते हैं। परशुराम ने 21 बार अत्याचारी क्षत्रियों का संहार किया, जबकि कल्कि अवतार को भविष्य में अधर्म के पूर्ण विनाश के लिए आना है। फिर भी नरसिंह अवतार सबसे अलग और अप्रत्याशित माना जाता है, क्योंकि यह रूप पूरी तरह न्याय और धर्म की रक्षा के लिए प्रकट हुआ।
असल में सबसे खतरनाक वही रूप होता है, जो धर्म की रक्षा के लिए अपनी पूरी शक्ति प्रकट कर दे। इस नजरिए से देखा जाए, तो नरसिंह अवतार न्याय की अग्नि का सबसे प्रचंड प्रतीक है।