निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने लगाई फांसी, सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में किया था बरी

Nithari Serial Killing Case Accused: कुख्यात निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में संदिग्ध हालात में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
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सुरेंद्र कोलीफाइल फोटो
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Surendra Koli Suicide: निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की आत्महत्या की खबर सामने आई है। सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में संदिग्ध हालात में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में सुरेंद्र कोली को निठारी कांड मामले में सभी आरोपों से बरी किया था।

सुरेंद्र कोली पिछले कुछ दिनों से हरिद्वार में चाय बेचने का काम कर रहा था। उसकी लाश चाय की दुकान के अंदर एक रस्सी से लटकी हुई मिली। पुलिस ने अल्मोड़ा में उसके परिवार को सूचना दे दी है और मामले की हर पहलू से जांच शुरू कर दी है।

चाय की दुकान में फांसी लगाई

सप्त ऋषि पुलिस चौकी को सूचना मिली कि सप्त सरोवर रोड पर लालमाता मंदिर के सामने स्थित एक चाय की दुकान में एक व्यक्ति ने फांसी लगा ली है। पुलिस मौके पर पहुंची और मृतक की पहचान अल्मोड़ा के भिकियासैंण स्थित मंगरूखाल गांव के रहने वाले सुरेंद्र कोली के तौर पर की।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 12 मामलों में किया था बरी

सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2011 में एक 15 साल की लड़की की हत्या के मामले में सुरेंद्र कोली की सजा को बरकरार रखा था। हालांकि, अपने खिलाफ बाकी 12 मामलों में इलाहाबाद हाई कोर्ट से बरी होने के बाद, उसने इस साल फिर से सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन (सुधारात्मक याचिका) दायर की थी।

भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने आज कोली को बरी कर दिया और आखिरी मामले में उसकी सजा को रद्द कर दिया था।

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निठारी मर्डर केस क्या है?

निठारी हत्याकांड नोएडा में 2005 और 2006 के बीच हुआ था। यह मामला दिसंबर 2006 में तब सामने आया जब नोएडा के निठारी गांव में एक घर के पास नाले में कई कंकाल मिले। पता चला कि वह घर मोनिंदर सिंह पंढेर का था और कोली उसका घरेलू नौकर था।

सुरेंद्र कोली पर इन हत्याओं, रेप, नरभक्षण (इंसानी मांस खाने) और अन्य अपराधों के आरोप थे। उसे 16 मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी। पंढेर को दो मामलों में दोषी ठहराया गया था, लेकिन 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दोनों को सभी मामलों में बरी कर दिया। कोर्ट ने जांच एजेंसियों (यूपी पुलिस और CBI) की लापरवाही भरी जांच की आलोचना की थी।

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