Yavatmal Water Crisis: पिछले दो महीनोंसे बारिश के गायब रहने के कारण राज्य के अधिकांश बांधों के जलसंग्रह में कमी आ रही है। इसका असर पुसद तहसील के इसापुर बांध पर भी दिखाई दे रहा है।
बांध का जलस्तर दिन-ब-दिन कम हो रहा है। ऐसे में आगामी रबी सीजन की फसलों के लिए पानी उपलब्ध होगा या नहीं, साथ ही भविष्य में पेयजल संकट पैदा होने की आशंका को लेकर किसानों और ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। 2 अक्टूबर की सुबह 6 बजे इसापुर बांध का जलस्तर 437.850 मीटर दर्ज किया गया।
बांध का पूर्ण जलस्तर 441.00 मीटर है। इसकी पूर्ण संचय क्षमता 1,279.0631 दशलक्ष घनमीटर यानी 45.173 टीएमसी है। इसमें उपयोगी जलसंचय क्षमता 964.0994 दशलक्ष घनमीटर (34.094 टीएमसी), जबकि मृतसंचय 314.9637 दशलक्ष घनमीटर (11.124 टीएमसी) है। वर्तमान में बांध में कुल 975.4348 दशलक्ष घनमीटर (34.449 टीएमसी) पानी उपलब्ध है। इसमें उपयोगी जलसंचय 660.4711 दशलक्ष घनमीटर (23.326 टीएमसी) है. उपयोगी जलसंचय का प्रतिशत 68.51 है। पिछले वर्ष इसी दिन बांध का जलस्तर 440.93 मीटर था और उपयोगी जलसंचय 957.4047 दशलक्ष घनमीटर यानी 99.31 प्रतिशत था।
इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में जलभंडारण में बड़ी कमी दर्ज की गई है। इस वर्ष 1 जून से अब तक बांध परिसर में केवल 581 मिमी बारिश हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 1,395 मिमी बारिश दर्ज की गई थी।
पिछले 24 घंटे में बांध में पानी की आवक शून्य दशलक्ष घनमीटर रही।औसत आवक भी शून्य क्यूमेक्स दर्ज की गई है। 1 जून 2026 से अब तक बांध में कुल 280.4697 दशलक्ष घनमीटर पानी की आवक हुई है। इसापुर बांध के कुल 15 स्पिलवे गेट हैं और वर्तमान में सभी गेट बंद हैं। बांध से पानी का विसर्ग शून्य क्यूसेक्स है। पिछले 24 घंटे में तथा अब तक स्पिलवे से पानी नहीं छोड़ा गया है।
शेंबालपिंपरी से महज चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित इसापुर बांध का जलसाठा बारिश के अभाव में लगातार घट रहा है। इसका सीधा असर आगामी रबी सीजन पर पड़ने की आशंका है। किसानों को रबी फसलों के लिए पानी मिलेगा या नहीं, इसे लेकर चिंता बनी हुई है।
वहीं, स्थानीय जलस्रोतों में भी पानी कम होने से भविष्य में ग्रामीणों और आम नागरिकों के सामने पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। बारिश की स्थिति में सुधार नहीं होने पर किसानों, ग्रामीणों और प्रशासन के सामने जलसंकट की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। ऐसे में बांध में उपलब्ध पानी का नियोजन, रबी सीजन के लिए सिंचाई के पानी का वितरण तथा भविष्य की पेयजल आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को समय रहते नियोजन करना आवश्यक होगा।