

Isapur Dam Water Reserved Till October: बारिश की आशंका और जल संकट की संभावित स्थिति को देखते हुए जलसंपदा विभाग ने इसापुर बांध के पानी के उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। अब बांध से कृषि सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी गई है और उपलब्ध वाटर लेवल केवल पेयजल आवश्यकताओं के लिए आरक्षित रखा जाएगा।
मौजूदा समय में इसापुर बांध में केवल 42.59 प्रतिशत जलसंग्रह उपलब्ध है। मौसम विभाग ने 'एल नीनो' के प्रभाव के कारण इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना जताई है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने भविष्य में संभावित पेयजल संकट से बचाव के लिए यह कदम उठाया है। प्रशासन ने उपलब्ध पानी को आगामी अक्टूबर तक केवल पेयजल आपूर्ति के लिए सुरक्षित रखने की योजना बनाई है।
उमरखेड़ शहर सहित मुलावा,पलशी, बेलखेड, मालेगांव, तिवड़ी, विडूल, साखरा, खरुस, कारखेड, देवसरी, दिघड़ी, उंचवडद, चातारी, ढाणकी और बिटरगांव समेत कई गांवों की पेयजल व्यवस्था इसापुर बांध पर निर्भर है। जिलाधिकारी तथा जलसंपदा विभाग के अधिकारियों को जिले के सभी बांधों और जलाशयों में उपलब्ध जलसंग्रह की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जल संरक्षण और पानी के मितव्ययी उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
सिंचाई के लिए बांध का पानी बंद होने से उमरखेड़ तहसील के किसानों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। प्रशासन और कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से उपलब्ध जलस्रोतों का सावधानीपूर्वक उपयोग करने तथा जल संरक्षण उपाय अपनाने की अपील की है।
जलसंपदा विभाग के प्रधान सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार, बांध में उपलब्ध पानी का उपयोग अब केवल पेयजल आपूर्ति के लिए किया जाएगा। अक्टूबर तक जलसंग्रह का नियोजन अत्यंत सावधानी से किया जाएगा। सिंचाई अथवा अन्य किसी उद्देश्य के लिए बांध के पानी के उपयोग पर रोक लगा दी गई है। उमरखेड सहित पूरे जिले में भविष्य में पेयजल संकट उत्पन्न न हो, इसके लिए प्रशासन ने प्रतिबंधात्मक उपायों पर काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों को जलस्रोतों की लगातार निगरानी करने और पानी बचत संबंधी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।