नासिक में सूखी खरीफ की फसलें, अब रबी सीजन पर भी मंडराया संकट; येवला में 3 मीटर से ज्यादा नीचे गिरा जलस्तर

Nashik Groundwater Crisis: नासिक में औसत से 23.46% कम बारिश के कारण खरीफ फसलें प्रभावित हुई हैं। येवला में भूजल स्तर 3 मीटर से अधिक गिरा, जबकि कई तहसीलों में 2-3 मीटर की कमी दर्ज हुई।
Nashik Rainfall Deficit Groundwater Level Rabi Crop Crisis
बारिश की कमी से भूजल स्तर और रबी फसल का संकट(सोर्स: AI)
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Rainfall Deficit Rabi Crop Crisis In Nashik : बारिश की भारी कमी के कारण खरीफ सीजन की फसलें पूरी तरह से सूख चुकी हैं, जिससे किसानों को लागत तक निकलने की उम्मीद नहीं बची है। ऐसे में जिले के किसानों की नजरें अब सरकार से मिलने वाली आर्थिक मदद पर टिकी हैं।

दूसरी ओर, इस वर्ष जिले में औसत से बेहद कम बारिश होने के कारण पूरे जिले पर गहरे जल संकट का साया मंडराने लगा है। भूजल सर्वेक्षण एवं विकास एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जून से सितंबर 2025 के अंत तक नासिक जिले में औसत की तुलना में 23.96 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है।

नासिक जिले की वार्षिक औसत वर्षा 1,000.32 मिमी है, जबकि इस साल सितंबर के अंत तक महज 765.55 मिमी बारिश ही दर्ज हो सकी है। इस तरह जिले में 234.67 मिमी (23.46%) बारिश की कमी दर्ज हुई है, जिसका सीधा और गंभीर असर न केवल फसलों पर बल्कि भूजल स्तर पर भी पड़ा है।

2 से 3 निरीक्षण कुओं से हुई जांच

प्रत्येक जलस्तर क्षेत्र के लिए दो से तीन निरीक्षण कुओं को चिह्नित किया गया था, जिनके आधार पर सितंबर के अंत में भूजल स्तर दर्ज किया गया। इन आंकड़ों की तुलना सितंबर महीने के पिछले पांच वर्षों के औसत स्थिर भूजल स्तर से की गई। जांच में सामने आया कि येवला तहसील में पानी के स्तर में 3 मीटर से भी अधिक की गिरावट आई है।

इसके अलावा चांदवड, देवला, मालेगांव, नांदगांव और सिन्नर में पानी का स्तर 2 से 3 मीटर तक नीचे चला गया है। वहीं नासिक और त्र्यंबकेश्वर में 0 से 1 मीटर तक की गिरावट दर्ज की गई है। केवल दिंडोरी और निफाड तहसीलों में ही जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी देखी गई है।

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रबी सीजन भी मंडराया संकट

बारिश की कमी और भूजल स्तर में आई इस तेज गिरावट से आने वाले दिनों में सभी प्राकृतिक जल स्रोतों पर दबाव बढ़ना तय है। विशेष रूप से जिन तहसीलों में बारिश की 25 प्रतिशत से अधिक कमी दर्ज की गई है, वहां खरीफ के साथ-साथ आगामी रबी सीजन के लिए भी सिंचाई के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

कुओं, बोरवेल और अन्य भूजल स्रोतों पर निर्भर रहने वाले किसानों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक मानी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, नासिक जिले और बागलान तहसीलों में बारिश की 1 से 10 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है।

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