Wardha Hindi University Student Protest: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में पिछले 25 दिनों से विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार को निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। छह छात्रों के निलंबन और उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज किए जाने के विरोध में आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों के बीच वंचित बहुजन आघाड़ी के महाराष्ट्र कार्यकारिणी सदस्य सुजात आंबेडकर के शामिल होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने चर्चा की।
इसके बाद प्रशासन ने छह छात्रों का निलंबन वापस लेकर उन्हें विश्वविद्यालय में पुन: प्रवेश देने पर सहमति जताई। साथ ही छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से समाप्त कराने का आश्वासन दिए जाने की जानकारी आंदोलनकारियों ने दी। छात्र छात्रावास में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने तथा मेस में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता सुधारने सहित विभिन्न सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे।
आंदोलन को वंचित बहुजन आघाड़ी और सम्यक विद्यार्थी संगठन ने समर्थन दिया था। आंदोलनकारियों का आरोप था कि छात्रों की समस्याएं सुनने के बजाय उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
इसके विरोध में छात्रों ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने भी आंदोलन जारी रखा था। सोमवार को सुजात आंबेडकर ने विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेशद्वार के सामने आंदोलन करते हुए प्रशासन से जवाब मांगा। इसके बाद प्रशासन ने छात्र प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए बुलाया।
चर्चा के दौरान विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच समिति की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए गए। सुजात आंबेडकर ने कहा कि जांच समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश को शामिल किया जाए तथा प्रशासन और छात्र दोनों के पक्ष सुने जाएं। छात्रों को निशाना बनाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान कर सुविधाओं में सुधार करने की मांग भी की गई।
प्रशासन ने इन मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाने की जानकारी दी गई। आंदोलन में खुशाल मेश्राम, वंचित के जिलाध्यक्ष किशोर खैरकार, राहुल दहिकर, नीरज वाघमारे, कुणाल वासेकर, नितीन इंदूरकर, बंडू भित्रे, किशोर म्हस्के, विशाल शेंडे और दीपक फुसाटे सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी व कार्यकर्ता शामिल हुए थे।