Thane Internal Ring Metro Project Route Dispute Pratap Sarnaik: ठाणे आंतरिक रिंग मेट्रो के रूट को लेकर शिवसेना (शिंदे गुट) में ही मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक द्वारा सुझाए गए वैकल्पिक मार्ग का स्थानीय नगरसेवकों ने विरोध किया है।
उन्होंने 'रिंग मेट्रो मिलनी ही चाहिए, लेकिन मूल मार्ग पर ही' यह रुख अपनाते हुए मानव श्रृंखला बनाकर प्रदर्शन किया। इसके चलते सरनाईक बनाम स्थानीय नगरसेवक मुकाबला छिड़ गया है।
ठाणे आंतरिक रिंग मेट्रो के रूट को लेकर अब सीधे शिंदे सेना में ही संघर्ष की चिंगारी सुलग उठी है। लोकमान्य नगर से शिवाई नगर, उपवन होते हुए जाने वाले मूल मार्ग का परिवहन मंत्री व विधायक प्रताप सरनाईक ने विरोध करते हुए एक वैकल्पिक मार्ग का सुझाव दिया था।
हालांकि, उनकी ही पार्टी के स्थानीय नगरसेवकों ने इस रुख का विरोध किया है। नगरसेवक दिलीप बारटक्के और कांचन चिंदरकर के नेतृत्व में नागरिकों ने 'रिंग मेट्रो मिलनी ही चाहिए, लेकिन मूल मार्ग पर ही' यह मांग करते हुए मानव श्रृंखला बनाकर शक्ति प्रदर्शन किया। इस बहाने शिंदे सेना के भीतर मतभेद भी सार्वजनिक हो गए हैं।
ठाणे आंतरिक रिंग मेट्रो के स्वीकृत मूल मार्ग में बदलाव करने के प्रस्ताव का स्थानीय नागरिकों ने कड़ा विरोध जताया है। लोकमान्य टीएमटी डिपो, आई माता मंदिर, कोरस रोड, वर्तक नगर नाका और शास्त्रीनगर के रास्ते एक वैकल्पिक मार्ग प्रस्तावित किए जाने के विरोध में गुरुवार शाम आई माताजी चौक पर मानव श्रृंखला बनाकर प्रदर्शन किया गया।
नागरिकों का दावा है कि यदि मूल मार्ग बदला गया तो जनता को बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ेगा। म्हाडा कॉलोनी, दोस्ती, वेदांत कॉम्प्लेक्स, उसेना कोरस टॉवर, रुणवाल प्लाजा, अनिझरा, तमन्ना, अमित, भैरी भवानी और डवलेनगर परिसर की विभिन्न सोसायटियों और आवासीय परिसरों के नागरिक इस आंदोलन में शामिल हुए। उन्होंने मूल मार्ग को ही यथावत रखने की मांग की है।
नागरिकों ने आशंका जताई है कि मार्ग बदलने से पेड़ों की कटाई, सड़कों के नीचे से गुजरने वाली उपयोगी लाइने (सर्विसेज पाइपलाइन/केबल) और विस्थापन की समस्या पैदा हो जाएगी।
आंदोलनकारियों का दावा है कि नए मार्ग से हजारों नागरिकों के प्रभावित होने की संभावना है, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या और बढ़ सकती है। इसलिए, रिंग मेट्रो का मार्ग बदलने की बजाय, इस प्रोजेक्ट को पहले से मंजूर किए गए मूल मार्ग पर ही आगे बढ़ाया जाए, ऐसी मांग की गई है।
आंदोलनकारियों का दावा है कि इस मामले की वास्तविक स्थिति उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सामने रख दी गई है और उन्होंने भी इस विषय का गंभीरता से संज्ञान लिया है। इसलिए, अब प्रशासन और राज्य सरकार इस मार्ग के बारे में क्या रुख अपनाते हैं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।