ABVP VS NSUI Student Politics: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 में इस बार मुकाबला सिर्फ ABVP और NSUI के बीच नहीं, बल्कि विपक्षी खेमे की अंदरूनी कलह भी बड़ा मुद्दा बन गई है। जेन जी आंदोलन और सत्य निकेतन हादसे के बाद सत्ता विरोधी माहौल की चर्चा थी, लेकिन चुनावी समीकरण अब अलग दिशा में जाते दिख रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि NSUI के तीन बागी उम्मीदवार मैदान में उतरने से संगठन का पारंपरिक वोट बैंक बंट सकता है, जिसका सीधा लाभ ABVP को मिल सकता है। वहीं NSUI सामाजिक प्रतिनिधित्व के दांव के साथ आदिवासी छात्र नेता विजय शंकर मीणा को अध्यक्ष पद पर उतारकर नया संदेश देने की कोशिश कर रही है।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) 2026 चुनाव के उम्मीदवारों की सुची-
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 में NSUI के बागी उम्मीदवारों की एंट्री ने मुकाबले को नया मोड़ दे दिया है। चार प्रमुख पदों में से तीन पर बागी चेहरे मैदान में हैं- समर्थ बेनीवाल (अध्यक्ष), हिमांशु शौकीन (उपाध्यक्ष) और विशेष यादव (सह सचिव)।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन उम्मीदवारों की मौजूदगी से NSUI के पारंपरिक वोट बैंक में विभाजन हो सकता है। ऐसे में मौजूदा चुनावी समीकरणों में ABVP को संभावित बढ़त मिलती हुई दिखाई दे रही है।
DUSU चुनाव 2026 में NSUI ने अध्यक्ष पद के लिए इस बार आदिवासी समाज से आने वाले छात्र नेता विजय शंकर मीणा को उम्मीदवार बनाया है। संगठन इसे सामाजिक प्रतिनिधित्व और नए नेतृत्व को आगे लाने की रणनीति के रूप में पेश कर रहा है।
वहीं, उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार वीर चतरथ भी चर्चा में हैं। उनके पिता मनीष चतरथ कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता हैं, जिससे उनकी उम्मीदवारी को भी राजनीतिक महत्व माना जा रहा है।
DUSU चुनाव 2026 में सचिव पद सबसे रोचक मुकाबलों में से एक माना जा रहा है। इस सीट पर ABVP और NSUI दोनों ने महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जिससे मुकाबला सीधा और नजदीकी होने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, चुनाव प्रचार तेज होने के साथ सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या NSUI की अंदरूनी बगावत ABVP को बढ़त दिलाएगी, या फिर NSUI अपना पारंपरिक वोट बैंक एकजुट रखने में सफल रहेगा।