ऑल पार्टी अधिकार सुरक्षा संघर्ष समिति (फोटो नवभारत)
ठाणे

ठाणे में कल्याण-डोंबिवली के भूमिपुत्रों की जमीन वापसी की मांग, सरकार और कोर्ट तक लड़ाई ले जाने का ऐलान

Kalyan Dombivli 27 Villages Land Dispute: 27 गांवों की जमीन प्राइवेट डेवलपर्स को बेचने का आरोप लगाते हुए समिति ने भूमिपुत्रों को जमीन लौटाने और गुरुचरण जमीन स्थानीय हित में इस्तेमाल करने की मांग की।

अशोक वर्मा, आलोक उमाकृष्ण

Highlights

  • 28 अक्टूबर को कोंकण भवन में प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात।

  • कोंकण विभागीय आयुक्त के सामने मुद्दा उठाया।

  • गुरुचरण जमीन MMRDA को हस्तांतरित करने पर आपत्ति।

Land Dispute In Thane: ऑल पार्टी अधिकार सुरक्षा संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि कल्याण-डोंबिवली महानगर पालिका क्षेत्र में शामिल 27 गांवों में भूमिपुत्रों की ज़मीन इंडस्ट्रियल कामों के लिए लेने के बाद प्राइवेट डेवलपर्स को बेच दी गई। समिति ने मांग की है कि ये ज़मीनें भूमिपुत्रों को वापस की जाएं।

इस बारे में 28 अक्टूबर को समिति के एक डेलीगेशन ने कोंकण डिविजनल कमिश्नर और 27 गांवों की गुरुचरन जमीन SIT के हेड से नवी मुंबई के कोंकण भवन में मुलाकात की। इस मौके पर समिति के पदाधिकारियों ने भूमिपुत्रों की ज़मीन और गुरुचरण ज़मीन के इस्तेमाल के मुद्दे पर अपना पक्ष रखा।

खेती की ज़मीन इंडस्ट्रियल कंपनी के लिए दे दी

27 गांवों के भूमिपुत्रों ने अपनी गुरुचरण और प्राइवेट खेती की ज़मीन एक बड़ी इंडस्ट्रियल कंपनी के लिए दे दी थी। उम्मीद थी कि इससे स्थानीय लोगों को परमानेंट नौकरी मिलेगी। लेकिन, कमिटी ने आरोप लगाया है कि इन ज़मीनों पर इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट लगाने के बजाय, बिल्डिंग बनाने का रास्ता बनाने के लिए ज़मीन प्राइवेट डेवलपर्स को बेच दी गई है। इसलिए यह मांग की गई कि ज़मीन मालिकों को उनकी ज़मीन वापस मिलनी चाहिए।

इसके अलावा कमिटी ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में गुरचरण की ज़मीनों को एक क्लास में बांटकर MMRDA को महाराष्ट्र सरकार द्वारा जनरल ट्रांसफर करने का मुद्दा भी उठाया। यह मांग की गई कि इन ज़मीनों का इस्तेमाल प्राइवेट डेवलपर्स को देने के बजाय सिर्फ़ संबंधित गांवों और लोकल लोगों के फ़ायदे के लिए स्तेमाल किया जाना चाहिए।

27 गांवों के हक के लिए जारी रहेगी लड़ाई

ठाणे जिले के समिति के सदस्यों ने कहा कि भले ही 27 गांवों के भूमिपुत्रों के अधिकारों की लड़ाई शुरू करने में देरी हुई हो, लेकिन अब वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। जमीन से जुड़े मुद्दों और स्थानीय लोगों के अधिकारों को लेकर समिति अपनी आवाज लगातार उठाती रहेगी। इसके लिए सरकार के स्तर पर संबंधित विभागों और अधिकारियों के सामने मांगें रखी जाएंगी।

जरूरत पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा। समिति ने स्पष्ट किया कि भूमिपुत्रों की जमीन वापस दिलाने और गुरुचरण जमीन का उपयोग स्थानीय लोगों के हित में सुनिश्चित कराने के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।

बद्रीनाथ से देहरादून जा रहा हेलीकॉप्टर क्रैश, बेंगलुरु के 5 यात्रियों की भी मौत

सुप्रीम कोर्ट में बड़े वकीलों की मोनोपोली पर बहस, कौन हैं भारत के 10 सबसे महंगे वकील? देखें लिस्ट

समालखा के 79वें निरंकारी संत समागम: माता सुदीक्षा का संदेश लेकर लौटे नागपुर के श्रद्धालु

मैं CM फडणवीस और उद्धव ठाकरे को हमेशा के लिए साथ ला सकता हूं, रामदास आठवले का बड़ा दावा

मनोज तिवारी ने यमुना के सोनिया विहार घाट पर मारी डुबकी, पराली को लेकर पंजाब की AAP सरकार पर कसा बड़ा तंज