

गुरुवार रात 9 बजे बाघ का निधन।
पिछले आठ दिनों से चल रहा था इलाज।
जिला पशु चिकित्सालय में हुआ शव परीक्षण।
वन विभाग की मौजूदगी में अंतिम संस्कार।
Chhatrapati Sambhajinagar Siddharth Zoo Tiger Death: सिद्धार्थ उद्यान एवं प्राणिसंग्रहालय में 17 वर्षीय बाघ 'सिद्धार्थ' का गुरुवार रात 9 बजे निधन हो गया। पिछले आठ दिनों से बीमार चल रहे बाघ को बचाने के लिए पशु चिकित्सकों की टीम ने हरसंभव प्रयास किए, लेकिन अधिक आयु और कमजोर होती शारीरिक स्थिति के कारण उसे बचाया नहीं जा सका।
प्राणिसंग्रहालय प्रशासन के अनुसार, सामान्यतः बाघों की औसत आयु 16 से 18 वर्ष होती है। सिद्धार्थ की आयु भी इसी सीमा तक पहुंच चुकी थी। पिछले कुछ दिनों से उसकी शारीरिक गतिविधियां काफी कम हो गई थीं।
उसने भोजन करना भी कम कर दिया था। बीते आठ दिनों से उसे मल त्यागने में परेशानी हो रही थी। इसके बाद प्राणिसंग्रहालय के पशु चिकित्सकों की देखरेख में उसका इलाज शुरू किया गया।
बाघ को भोजन देना बंद होने के बाद उसे शिरा के माध्यम से तरल आहार, आवश्यक प्रतिजैविक औषधियां और शक्तिवर्धक इंजेक्शन दिए गए। चिकित्सकों ने लगातार उसकी निगरानी की, लेकिन बढ़ती आयु के कारण इलाज का अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। आखिरकार गुरुवार रात उसने दम तोड़ दिया।
शुक्रवार को खड़केश्वर स्थित जिला पशु चिकित्सालय के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने 17 वर्षीय बाघ 'सिद्धार्थ' के शव का परीक्षण किया। इस प्रक्रिया के दौरान बाघ की मौत से संबंधित आवश्यक चिकित्सकीय जांच की गई। शव परीक्षण पूरा होने के बाद वन विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में नियमानुसार पंचनामा तैयार किया गया।
इसके बाद प्रशासनिक और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर बाघ का अंतिम संस्कार किया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका और वन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। बाघ की मौत के बाद प्राणिसंग्रहालय प्रशासन ने निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अंतिम संस्कार की कार्रवाई पूरी की।