Shiv Sena UBT Narendra modi & Donald Trump : मुंबई में चुनाव के दौरान मुफ्त योजनाओं और नकद लाभ की घोषणाओं को लेकर शिवसेना (यूबीटी) ने शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति की तुलना की।
पार्टी के मुखपत्र सामना में प्रकाशित संपादकीय में फ्रीबी कल्चर की आलोचना करते हुए आरोप लगाया गया कि जनता को मुफ्त सुविधाएं या आर्थिक लाभ देने की राजनीति लोकतांत्रिक मूल्यों और जवाबदेही को कमजोर कर सकती है।
संपादकीय में ट्रंप की प्रस्तावित ट्रंप डिविडेंडयोजना का उल्लेख किया गया। पार्टी ने दावा किया कि यदि रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस के दोनों सदनों में नियंत्रण हासिल करती है, तो हर वयस्क अमेरिकी के बैंक खाते में 5,000 डॉलर जमा करने का प्रस्ताव चुनावी समय में मतदाताओं को आकर्षित करने वाला कदम है।
शिवसेना (यूबीटी) ने इस प्रस्ताव की तुलना भारत में लागू विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से की। संपादकीय में लाडकी बहिन जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा गया कि दोनों देशों में चुनावी राजनीति के दौरान सीधे आर्थिक लाभ या मुफ्त सुविधाओं के जरिए समर्थन जुटाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
पार्टी ने दावा किया कि 5,000 डॉलर के प्रस्ताव से अमेरिकी सरकार के खजाने पर एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। साथ ही अमेरिका के राष्ट्रीय कर्ज और राजकोषीय घाटे का हवाला देते हुए योजना की आर्थिक व्यवहार्यता पर सवाल उठाए गए।
सामना के संपादकीय में यह भी आरोप लगाया गया कि ट्रंप की घोषणा के बाद उनकी अपनी पार्टी के भीतर भी प्रस्ताव को लेकर सवाल उठे। पार्टी ने उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस की प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए दावा किया कि भुगतान के लिए जांच और कानूनी प्रक्रियाओं की जरूरत बताई गई।
शिवसेना (यूबीटी) ने इसी आधार पर भारत की राजनीति से तुलना करते हुए आरोप लगाया कि पहले बड़ी घोषणाएं की जाती हैं और बाद में शर्तों तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण उनके क्रियान्वयन में देरी होती है।
भारत का उदाहरण देते हुए संपादकीय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 के उस कथित चुनावी वादे का उल्लेख किया गया, जिसमें विदेशों में जमा काला धन वापस लाकर प्रत्येक भारतीय के खाते में 15 लाख रुपये आने की बात को लेकर राजनीतिक बहस हुई थी। पार्टी ने कहा कि यह वादा पूरा नहीं हुआ।
शिवसेना (यूबीटी) ने बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन बुनियादी मुद्दों का समाधान अधिक महत्वपूर्ण है। पार्टी ने आरोप लगाया कि देशभर में कल्याणकारी योजनाओं का इस्तेमाल तेजी से चुनावी रणनीति के रूप में किया जा रहा है।
संपादकीय के अंत में शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि मोदी-शाह भारत में और ट्रंप अमेरिका में जनता के पैसे से लाभ देकर चुनावी समर्थन हासिल करने की समान रणनीति अपना रहे हैं। पार्टी के अनुसार, लाभार्थी अलग हो सकते हैं, लेकिन इसके पीछे की राजनीतिक सोच एक जैसी है।
हालांकि, ये टिप्पणियां शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र सामना में प्रकाशित राजनीतिक आरोप और संपादकीय विश्लेषण हैं।