

BRICS Members Agreeing On BRICS Joint Declaration: भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स समिट में सभी मेंबर देशों को एक साझा जॉइंट स्टेटमेंट पर सहमत कराने में बड़ी डिप्लोमैटिक सक्सेस मिली है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और मेंबर देशों के बीच मतभेदों के बावजूद भारत ने सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई।
ब्रिक्स समिट के पहले दिन शनिवार को जॉइंट डिक्लेरेशन जारी करने की तैयारी पूरी कर ली गई। इसे लेकर मेंबर देशों के बीच शुक्रवार रात से शुरू हुई डिप्लोमैटिक बातचीत शनिवार सुबह करीब 4 बजे तक चली।
वार्ता के शुरुआती दौर में कई सेंसिटिव ग्लोबल मुद्दों को लेकर मेंबर देशों के बीच मतभेद सामने आए। इसके बावजूद भारत ने लगातार बातचीत और डिप्लोमैटिक एफर्ट्स के जरिए सभी पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की।
भारत की अध्यक्षता में हुई इस प्रोसेस का उद्देश्य अलग-अलग मुद्दों पर मतभेदों के बावजूद ब्रिक्स देशों को साझा प्लेटफॉर्म पर बनाए रखना था। जॉइंट स्टेटमेंट पर सहमति को इसी दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
ब्रिक्स जॉइंट डिक्लेरेशन पर सहमति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस समय वेस्ट एशिया में गंभीर तनाव की स्थिति बनी हुई है। ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE भी ब्रिक्स के मेंबर हैं।
इन देशों के बीच रीजनल और स्ट्रैटेजिक मुद्दों को लेकर अलग-अलग मत रहे हैं। ऐसे माहौल में सभी मेंबर देशों को एक साझा बयान के लिए तैयार करना आसान नहीं था।
भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान इन मतभेदों को ब्रिक्स की व्यापक बातचीत की प्रोसेस पर हावी नहीं होने देने की कोशिश की। इसके साथ ही सभी देशों के लिए साझा ग्लोबल मैसेज देने की जरूरत पर जोर दिया गया।
इससे पहले मई में नई दिल्ली में हुई ब्रिक्स मिनिस्ट्रियल मीटिंग के दौरान जॉइंट डिक्लेरेशन को लेकर आम सहमति नहीं बन पाई थी। उस समय ईरान और UAE के बीच मतभेदों का असर बातचीत पर भी दिखाई दिया था।
मई की मीटिंग ब्रिक्स के इतिहास में ऐसा अवसर बनी, जब मिनिस्ट्रियल मीटिंग के बाद कोई आम जॉइंट स्टेटमेंट जारी नहीं हो सका। तब भारत ने केवल चेयर स्टेटमेंट और आउटकम डॉक्यूमेंट जारी किए थे।
इस बार भारत ने पुराने गतिरोध से आगे बढ़ते हुए सभी मेंबर देशों के बीच जॉइंट स्टेटमेंट पर सहमति बनाने में सफलता हासिल की है। इसे भारत की अध्यक्षता की अहम डिप्लोमैटिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स पर लगातार डायलॉग और डिप्लोमेसी के जरिए विवादों का समाधान करने की वकालत करते रहे हैं। भारत का कहना रहा है कि जटिल ग्लोबल समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए तलाशा जाना चाहिए।
ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान भारत ने ग्लोबल साउथ के हितों को प्रमुखता देने और समूह को किसी एक पक्ष के विरोध का प्लेटफॉर्म न बनाने पर जोर दिया है। इस अप्रोच में डेवलपिंग और इमर्जिंग इकोनॉमीज की प्राथमिकताओं को साझा मंच पर उठाना शामिल है।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में इकोनॉमिक डेवलपमेंट, कोऑपरेशन, स्टेबिलिटी और मल्टीलेटरल सिस्टम से जुड़े मुद्दों पर लगातार जोर दिया गया है। जॉइंट डिक्लेरेशन पर बनी सहमति को भी इसी बैलेंस्ड डिप्लोमैटिक अप्रोच से जोड़कर देखा जा रहा है।
पश्चिम एशिया में तनाव और ब्रिक्स मेंबर देशों के बीच अलग-अलग रुख के बावजूद साझा बयान पर सहमति भारत के लिए महत्वपूर्ण डिप्लोमैटिक उपलब्धि है। इससे मल्टीलेटरल प्लेटफॉर्म पर भारत की डायलॉग और कंसेंसस बनाने की भूमिका भी मजबूत होती है।