तुकाराम महाराज की पालकी (सोर्सः सोशल मीडिया)  
पुणे

पुणे में 'ज्ञानोबा-तुकाराम' का जयघोष: ज्ञानेश्वर व तुकाराम महाराज की पालकी का भव्य स्वागत, 6 लाख वारकरी पहुंचे

Pune Palkhi Sohla: संत ज्ञानेश्वर और संत तुकाराम महाराज की पवित्र पालकियों का पुणे में भव्य स्वागत। इंद्रायणी नदी में बाढ़ के चलते सीधे पुणे पहुंचे 6 लाख से अधिक वारकरी।

रूपम सिंह

Pune Palkhi Sohla Sant Tukaram Maharaj: टाल-मृदंग की थाप, 'ज्ञानोबा-तुकाराम' के पावन जयघोष और विठ्ठल नाम की गूंज से पूरी पुणे नगरी भक्तिरस में सराबोर हो उठी। गुरुवार को जब संतश्रेष्ठ ज्ञानेश्वर महाराज और जगदुरु तुकाराम महाराज की पवित्र पालकियां शहर में प्रविष्ट हुईं, तो जनसैलाब उमड़ पड़ा।

भावुक श्रद्धालुओं ने पलक-पावड़े बिछाकर और पुष्पवर्षा कर वैष्णवों के इस महामेले का भव्य स्वागत किया। देर रात श्रद्धा और असीम उत्साह के बीच दोनों पालकियां अपने निर्धारित मुकाम पर पहुंचीं। भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा, सुचारु दर्शन और सुगम यातायात के लिए कड़े व मुस्तैद प्रबंध किए हैं।

आकुर्डी, वाकडेवाड़ी होते हुए पुणे पहुंची

संत तुकाराम महाराज की पालकी आकुर्डी, कासारवाडी, दापोडी, बोपोडी और वाकडेवाडी मार्ग से होते हुए पुणे में दाखिल हुई। वहीं संत ज्ञानेश्वर महाराज की पालकी कलस, येरवडा, खड़की और संगमवाडी मार्ग से होते हुए शहर में पहुंची।

इसके बाद दोनों पालकियां अपने-अपने निर्धारित विश्राम स्थलों तक पहुंचीं। संत ज्ञानेश्वर महाराज की पालकी का मुकाम भवानी पेठ स्थित पालकी विठोबा मंदिर में, जबकि संत तुकाराम महाराज की पालकी का मुकाम नाना पेठ स्थित निवडुंग्या विठोबा मंदिर में रखा गया था।

स्वागत के लिए उमड़े पुणेकर

पिछले कई दिनों से लगातार हो रही बारिश गुरुवार को थम गई। मौसम साफ रहने से वारकरियों को राहत मिली। पालकी मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालुओं की भीड़ थी। सामाजिक संस्थाओं, गणेश मंडलों और स्वयंसेवकों ने जगह-जगह भोजन, पानी और नाश्ते की व्यवस्था की।

कलस और बोपोडी में महापौर मंजुषा नागपुरे ने पालकियों की पादुकाओं का पूजन किया। शनिवार को संत ज्ञानेश्वर महाराज की पालकी सासवड, जबकि संत तुकाराम महाराज की पालकी लोणी कालभोर के लिए रवाना होगी।

6 लाख से अधिक वारकरी पहुंचे पुणे

इंद्रायणी नदी में आई बाढ़ को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं से देहू और आलंदी के बजाय सीधे पुणे पहुंचने की अपील की थी। इसका असर यह रहा कि गुरुवार सुबह से ही बड़ी संख्या में वारकरी शहर में पहुंचने लगे। आंकड़ों के मुताबिक, संत तुकाराम महाराज की पालकी के साथ करीब 2 लाख और संत ज्ञानेश्वर महाराज की पालकी के साथ 4 लाख से अधिक, यानी कुल 6 लाख से ज्यादा वारकरी पुणे पहुंचे हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

पालकी के मुकाम (ठहराव) को देखते हुए मनपा ने स्वच्छता, पेयजल, चिकित्सा और शौचालय सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई है। अस्थायी मंडप बनाए गए हैं, जहां वारकरियों के विश्राम और भोजन की व्यवस्था की गई है।

पुलिस प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। इस बीच, मनपा का 'पुणे प्रथम-सेवावारी' अभियान विवादों में आ गया है। अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए पत्रकों और स्वागत होर्डिंग पर उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की तस्वीरें नहीं होने पर विपक्ष के नेता निलेश निकम ने आपत्ति जताई है।

एक नजर में

  • 'ज्ञानोबा-तुकाराम' के जयघोष से गूंजा पुणे।
  • बारिश थमने से वारकरियों और श्रद्धालुओं को मिली राहत।
  • दोनों पालकियों का फूलों की वर्षा से स्वागत।
  • युवाओं और महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही।
  • रंगोलियों, शंखनाद और फुगड़ी ने भक्ति का माहौल बनाया।
  • शनिवार को पालकियां पुणे से अगले पड़ाव के लिए रवाना होंगी।

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