IPS अमिताभ गुप्ता और जालिंदर सुपेकर (सोर्स: सोशल मीडिया) 
पुणे

पुणे के वैष्णवी हगवणे केस में बड़ा फैसला, IPS अधिकारी अमिताभ गुप्ता और सुपेकर को क्लीन चिट

Vaishnavi Hagwane Case: पुणे के चर्चित वैष्णवी हगवणे सुसाइड केस से जुड़े आर्म्स लाइसेंस विवाद में IPS अमिताभ गुप्ता और जालिंदर सुपेकर को बड़ी राहत मिली है। गृह विभाग ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया।

आकाश मसने

IPS Amitabh Gupta And Jalindar Supekar Clean Chit: महाराष्ट्र के पुलिस महकमे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। पुणे जिले में चर्चित वैष्णवी हगवणे आत्महत्या मामले से उपजे 'शस्त्र लाइसेंस' विवाद में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ गुप्ता और जालिंदर सुपेकर को राज्य गृह विभाग ने पूरी तरह क्लीन चिट दे दी है। इस फैसले के साथ ही पिछले काफी समय से अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर लग रहे आरोपों पर विराम लग गया है।

433 लाइसेंसों की जांच में क्या निकला?

जांच का मुख्य केंद्र पुणे पुलिस आयुक्तालय के दौरान जारी किए गए 433 शस्त्र लाइसेंस थे। गृह विभाग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि ये सभी लाइसेंस आर्म्स एक्ट 1959 और आर्म्स रूल्स 2016 के कड़े प्रावधानों का पालन करते हुए जारी किए गए थे। जांच में किसी भी प्रकार की प्रक्रियात्मक चूक या नियमों का उल्लंघन नहीं पाया गया।

पद के दुरुपयोग के आरोप हुए खारिज

जालिंदर सुपेकर पर आरोप था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने रिश्तेदारों (हगवणे बंधुओं) को शस्त्र लाइसेंस दिलाने में मदद की थी। हालांकि, गृह विभाग की उच्च स्तरीय जांच ने इन दावों को आधारहीन करार दिया है। गौरतलब है कि इस विवाद के चलते सुपेकर का तबादला कर उन्हें कम महत्वपूर्ण पद पर भेज दिया गया था। अब दोषमुक्त होने के बाद, महकमे में चर्चा है कि दोनों अधिकारियों की जल्द ही महत्वपूर्ण पदों पर रीपोस्टिंग की जा सकती है।

ACB की जांच में भी मिले 'कोरे' सबूत

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने भी इस मामले में गहन छानबीन की थी। एसीबी को जालिंदर सुपेकर के खिलाफ कोई ठोस शिकायत या वित्तीय अनियमितता का सबूत नहीं मिला। इसके साथ ही, जांच के दायरे में आए पुलिस निरीक्षक शशिकांत चव्हाण की संपत्ति की जांच में भी कुछ संदिग्ध नहीं पाया गया। गृह विभाग ने आधिकारिक तौर पर संपत्ति की जांच को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है।

क्या है Vaishnavi Hagwane केस?

दहेज के लिए ससुरालियों की प्रताड़ना से तंग होकर पुणे की वैष्णवी हगवणे ने 16 मई 2025 को आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में पुलिस ने वैष्णवी के ससुर राजेंद्र हगवणे, पति शशांक, सास लता और ननद करिश्मा और जेठ सुशील को गिरफ्तार किया था।

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