Sangrambapu Bhandare Announces Silver Bangle For Slapping Vidyanand Bapat: महाराष्ट्र में गणेशोत्सव के नजदीक आते ही त्योहारों के दौरान बजने वाले DJ, लेजर लाइट और पारंपरिक वाद्यों को लेकर भारी विवाद छिड़ गया है। इस विवाद के केंद्र में पुणे के विद्यानंद बापट हैं, जो लगातार डीजे और ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
हाल ही में एक टीवी शो के दौरान विद्यानंद बापट पर हुए हमले के बाद यह मुद्दा और गरमा गया है। अब इस पूरे मामले में हिंदुत्ववादी विचारक और कीर्तनकार संग्रामबापू भंडारे की बेहद आक्रामक एंट्री हुई है। संग्रामबापू भंडारे ने विद्यानंद बापट पर तीखा हमला बोलते हुए एक बड़ा एलान कर दिया है।
कीर्तनकार संग्रामबापू भंडारे ने घोषणा की है कि विद्यानंद बापट को थप्पड़ मारने वाले कट्टर गणेश भक्त संतोष चव्हाण का वह खुद चांदी का कड़ा पहनाकर सम्मान करेंगे। भंडारे ने कहा कि संतोष भाऊ की वजह से ही उन्हें और अन्य लोगों को पता चला कि विद्यानंद बापट आखिर कौन हैं।
उन्होंने पुणे जिले के लोगों को आगाह करते हुए कहा कि जो लोग यह सोच रहे हैं कि बापट सिर्फ डीजे और लेजर लाइट का विरोध कर रहे हैं, वे बड़ी गलतफहमी में हैं।
संग्रामबापू भंडारे ने विद्यानंद बापट के नाम और इरादों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने बापट को विद्यानंद की जगह अविद्यानंद करार दिया। उन्होंने कहा कि आगे चलकर इस व्यक्ति का नाम अविद्यानंद चापट पड़ जाना चाहिए।
भंडारे ने तीखा सवाल उठाया, जो व्यक्ति ढोल-ताशा और लेझिम का विरोध करता है, वह महाराष्ट्रीय या भारतीय कैसे हो सकता है? उन्होंने बापट द्वारा गणेश विसर्जन जुलूस के रास्ते बदलने की मांग पर भड़कते हुए पूछा, मिरवणुक के रास्ते बदलने की बात कहने वाला यह व्यक्ति क्या हमारा बाप बन गया है?
भंडारे ने स्पष्ट किया कि धार्मिक कार्यक्रमों में बजने वाले डीजे और लेजर लाइट का विरोध वे खुद भी करते हैं। लेकिन उनका आरोप है कि विद्यानंद बापट का असली विरोध केवल डीजे तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ढोल-ताशा जैसे हिंदू धर्म के पारंपरिक वाद्यों और सार्वजनिक गणेशोत्सव की सदियों पुरानी परंपरा का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सबके पीछे एक बहुत बड़ी ताकत काम कर रही है जो बापट को प्रमोट कर रही है।
दूसरी तरफ, इस विवाद के दूसरे पक्ष यानी विद्यानंद बापट का मानना है कि ढोल-ताशा बजाने से गंभीर ध्वनि प्रदूषण होता है। बापट का सुझाव है कि यदि किसी को पारंपरिक वाद्य के रूप में ढोल-ताशा बजाना ही है, तो वे भीमसेन जोशी बालगंधर्व, गोलीबार मैदान या गणेश कला क्रीडा मंच जैसे बंद और पूरी तरह से साउंडप्रूफ ऑडिटोरियम में जाकर बजाएं।
उनका कहना है कि गणेश भक्तों को अपने खर्च पर ऐसा बंद प्रेक्षागृह बनाना चाहिए जहां ट्रिपल दरवाजे लगे हों ताकि आवाज बाहर न लीक हो और वहां वे चाहे तो 24 घंटे ढोल बजाएं, इस पर किसी को आपत्ति नहीं होगी।