AMU में चल रही हिटलरशाही...छात्रों के बाद अब शिक्षकों ने भी खोला मोर्चा, प्रशासन पर लगाए तानाशाही के आरोप

AMUTA Teachers Protest AMU Elections: एएमयू में चुनाव की मांग को लेकर शिक्षकों ने धरना प्रदर्शन किया। AMUTA ने विश्वद्यालय प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाया है।
AMU Statutory Bodies Election Demand
एएमयू में चुनाव की मांग को लेकर शिक्षकों का धरनासोर्स- नवभारत लाइव
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AMU Statutory Bodies Election Demand: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में चुनाव और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर अब छात्रों के साथ शिक्षक भी मुखर हो गए हैं। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (AMUTA) के बैनर तले शिक्षकों ने स्टाफ क्लब में एक दिन का धरना देकर विश्वविद्यालय के विभिन्न वैधानिक निकायों के चुनाव कराने की मांग उठाई।

धरने में शिक्षकों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन वक्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।

विश्वविद्यालय में तानाशाही का आरोप

AMUTA के सेक्रेटरी अशरफ मतीन ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में तानाशाही का माहौल है और लोकतंत्र खत्म होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की कोई भी मांग कानून के दायरे से बाहर नहीं है। सभी मांगें पूरी तरह वैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ी हैं।

पूर्व EC सदस्य मुसाविर अली ने कहा कि उनकी ऐसी कोई मांग नहीं है जो गैर-कानूनी या गैर-लोकतांत्रिक हो। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों, प्रोफेसरों और छात्रों समेत सभी वर्गों के चुनाव संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत कराए जाने चाहिए।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कुचलने का आरोप

मुसाविर अली ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि AMU में ‘हिटलरशाही’ चल रही है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कुचला जा रहा है। उनका कहना था कि चुनाव किसी एक वर्ग की जरूरत नहीं बल्कि विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

पूर्व EC सदस्य मुराद खान ने कहा कि गैर-शिक्षक कर्मचारी, शिक्षक और छात्रों की तमाम समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं। सभी वर्गों की अलग-अलग समस्याएं हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।

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एएमयू में चुनाव की मांग को लेकर शिक्षकों का धरनासोर्स- नवभारत लाइव

विश्वविद्यालय में चुनाव कराने की मांग

उन्होंने कहा कि शिक्षकों और छात्रों की अकादमिक समस्याओं से लेकर एडमिशन से जुड़ी समस्याएं तक लंबित हैं। इन समस्याओं का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनाव कराए जाएं और विभिन्न संस्थाओं में रिक्त पदों को भरा जाए।

मुराद खान ने कहा कि केंद्र और राज्य में लोकतांत्रिक सरकारें हैं और लोकतांत्रिक सरकारें यह नहीं चाहेंगी कि किसी शिक्षण संस्थान में लोकतंत्र की हत्या हो। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि AMU के भीतर ही कुछ लोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाना चाहते, और यही वजह है कि विश्वविद्यालय लगातार विभिन्न क्षेत्रों में पीछे जा रहा है।

शिक्षकों ने लंबित चुनावों पर उठाए सवाल

शिक्षकों ने विश्वविद्यालय के विभिन्न निकायों में लंबे समय से लंबित चुनावों को लेकर सवाल उठाए। उनके मुताबिक AMU में छात्र संघ के चुनाव 2018 से नहीं हुए हैं। वहीं, AMU कोर्ट के चुनाव भी 2018 से लंबित हैं और करीब 100 सीटें खाली हैं।

इसके अलावा एकेडमिक काउंसिल के चुनाव 2020 से लंबित बताए गए हैं, जबकि EC के चुनाव मई 2026 से लंबित हैं। शिक्षकों का कहना है कि इन चुनावों में देरी का सीधा असर विश्वविद्यालय की निर्णय प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ रहा है।

लगातार जोर पकड़ रहा चुनाव का मुद्दा

AMU में चुनाव का मुद्दा लगातार जोर पकड़ रहा है। एक दिन पहले ही छात्रों ने यूनियन हॉल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्र संघ चुनाव कराने की मांग की थी। अब शिक्षकों के धरने से यह मुद्दा और व्यापक हो गया है। धरने पर बैठे शिक्षकों ने कहा कि यदि प्रशासन ने जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की तो दोबारा बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

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ऐसे में आने वाले दिनों में AMU में चुनाव और लोकतांत्रिक संस्थाओं की बहाली को लेकर आंदोलन और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। AMUTA अध्यक्ष तुफैल अहमद समेत कई शिक्षक धरने में शामिल रहे। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन शिक्षकों और छात्रों की लगातार उठ रही चुनाव की मांग पर क्या कदम उठाता है।