Small Plot Development Demand In Pune: पुणे शहर में छोटे भूखंडों पर बढ़ी हुई निर्माण क्षमता के कारण ऊंची इमारतें तो खड़ी हो रही हैं, लेकिन आबादी के अनुपात में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार नहीं हो रहा है। सड़कों, पार्किंग, पानी, ड्रेनेज और अग्निसुरक्षा जैसी सुविधाओं पर दबाव बढ़ रहा है।
इसे देखते हुए छोटे भूखंडों पर अतिरिक्त फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) देने के प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की मांग उठने लगी है। पुणे महानगरपालिका में सत्ताधारी भाजपा के नगरसेवक पुनीत जोशी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया है।
नगरसेवक पुनीत जोशी शहर सुधार समिति के सदस्य भी हैं। उन्होंने कहा कि यूनिफाइड डेवलपमेंट कंट्रोल एंड प्रमोशन रेग्युलेशन्स (यूडीसीपीआर) के तहत छोटे भूखंडों पर भी अधिक निर्माण की अनुमति मिल रही है।
इससे इमारतों में फ्लैटों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन उस अनुपात में सड़कें, जलापूर्ति, ड्रेनेज और ठोस कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाएं विकसित नहीं हो रही हैं। इसका सीधा असर नागरिकों के जीवनस्तर पर पड़ रहा है।
जोशी ने कोथरूड की आइडियल कॉलोनी का उदाहरण देते हुए बताया कि पहले पांच से छह गुंठे के भूखंडों पर बनी इमारतों में प्रत्येक अपार्टमेंट में करीब 12 से 14 फ्लैट होते थे। लेकिन नई नियमावली के तहत अब उसी तरह के भूखंडों पर 40 से 45 फ्लैट बनाने की क्षमता पैदा हो गई है।
जोशी ने सुझाव दिया कि यूडीसीपीआर के तहत बढ़े हुए एफएसआई का लाभ देने पर कम से कम 15 हजार वर्गफुट से बड़े भूखंडों के लिए विचार किया जाए। साथ ही, छोटे भूखंडों को एक साथ जोड़कर नियोजित विकास करने वाली क्लस्टर डेवलपमेंट योजना को प्रोत्साहन दिया जाए।
इससे खुली जगह, आंतरिक सड़कें, पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं का बेहतर नियोजन संभव होगा।
- नवभारत लाइव के लिए पुणे से समीर सय्यद की रिपोर्ट