त्र्यंबकेश्वर मंदिर ट्रस्ट का 13 करोड़ का दान कोष सुरक्षित, कचरा प्रबंधन के लिए फंड ट्रांसफर का प्रस्ताव खारिज

Trimbakeshwar Temple Fund: त्र्यंबकेश्वर मंदिर का 13 करोड़ का दान कोष सुरक्षित है, कचरा प्रबंधन के लिए राशि मांगने का नगर परिषद का प्रस्ताव वापस। मांग के खिलाफ मंदिर महासंघ की कानूनी लड़ाई सफल रही।
Nashik Temple Fund Protection
मंदिर महासंघ ने सौपा ज्ञापन(सोर्स: नवभारत फोटो)
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Nashik Temple Fund Protection : श्री त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ट्रस्ट के 13 करोड़ रुपये के दान कोष को लेकर चल रहा विवाद अब समाप्त हो गया है। ठोस कचरा प्रबंधन के लिए देवस्थान ट्रस्ट का यह कोष त्र्यंबक नगर परिषद को सौंपने के प्रस्ताव के खिलाफ मंदिर महासंघ, महाराष्ट्र ने कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर विरोध दर्ज कराया था।

महासंघ का कहना था कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का इस्तेमाल देवस्थान तथा हिंदू संस्कृति के संरक्षण जैसे उद्देश्यों के लिए होना चाहिए। इसे नागरिक सुविधाओं के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है।

इस मामले में महासंघ की ओर से मुख्यमंत्री, विधि व न्याय राज्यमंत्री और धर्मार्थ आयुक्त को ज्ञापन दिया गया था। इसके बाद विधि व न्याय राज्यमंत्री आशीष जायसवाल ने धर्मार्थ आयुक्त को मामले की गहन जांच के निर्देश दिए। शासन स्तर पर जांच शुरू होने और मंदिर महासंघ के विरोध के बाद नगर परिषद को 13 करोड़ रुपये के कोष की मांग वापस लेनी पड़ी।

महासंघ ने रखे कानूनी तर्क

मंदिर महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने त्र्यंबकेश्वर नगर परिषद के मुख्य अधिकारी गोविंद जाधव और नासिक शहर के सह धर्मार्थ आयुक्त से मुलाकात कर मामले से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक बिंदु सामने रखे। महासंघ ने सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों का भी हवाला दिया।

महासंघ के अनुसार, आगामी सिंहस्थ कुंभ के लिए सरकार ने 34 हजार करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जिसमें त्र्यंबकेश्वर की सड़कों और कचरा प्रबंधन के लिए 277 करोड़ रुपये निर्धारित हैं। ऐसे में देवस्थान के दान कोष से कचरा प्रबंधन का खर्च उठाने की जरूरत पर सवाल उठाया गया।

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मंदिर के पैसे के इस्तेमाल पर आपत्ति

महासंघ ने यह भी तर्क दिया कि नगर परिषद को कर वसूलने का अधिकार है और उसके कुल पूंजीगत व्यय का 25 प्रतिशत कचरा प्रबंधन के लिए आरक्षित रखने का कानूनी प्रावधान है। उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए महासंघ ने मंदिर के दान कोष को अन्य विकास कार्यों में इस्तेमाल किए जाने पर आपत्ति जताई।

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भविष्य में चर्चा के बाद फैसला

मुख्य अधिकारी गोविंद जाधव ने स्पष्ट किया कि नगर परिषद ने ऐसा कोई नया प्रस्ताव पारित नहीं किया है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में इस तरह का कोई निर्णय लेने से पहले मंदिर महासंघ से चर्चा की जाएगी। इस आश्वासन के बाद त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ट्रस्ट के 13 करोड़ रुपये के कोष के हस्तांतरण का मामला फिलहाल शांत हो गया है।