NCP में अंदरूनी कलह के बीच बैठकों का दौर तेज।
देवगिरी बंगले पर देर रात हुई नेताओं की बैठक।
आज फिर कोर कमेटी की बैठक, फैसलों पर नजर।
पार्थ पवार के कामकाज को लेकर वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी।
ज्यादातर विधायकों ने सुनेत्रा के नेतृत्व पर भरोसा जताया।
Sunetra Pawar NCP Devgiri Meeting: महाराष्ट्र की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में अंदरूनी मतभेदों की चर्चाओं के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मुलाकात के बाद बैठकों का दौर जारी है।
मंगलवार रात उपमुख्यमंत्री और पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने अपने सरकारी आवास देवगिरी पर विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई। हालांकि, इस बैठक में सभी विधायक शामिल नहीं हुए। अब बुधवार सुबह 9 बजे कोर कमेटी की एक और बैठक आयोजित की जाएगी।
मंगलवार रात करीब चार घंटे तक चली बैठक में पार्टी के 50 विधायकों में से केवल 33 उपस्थित रहे। विधानसभा में पार्टी के 41 विधायक हैं, जिनमें से 29 बैठक में पहुंचे, जबकि 12 गैरहाजिर रहे। इस तरह बैठक से कुल 17 विधायकों की अनुपस्थिति दर्ज की गई।
बैठक में शामिल कुछ विधायकों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि सत्ता में होने के बावजूद उनके विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों को अपेक्षित गति नहीं मिल रही है। कुछ विधायकों ने एकनाथ शिंदे से जुड़े विभागों में काम नहीं होने की शिकायत भी की। इसके अलावा नेताओं के बीच चल रहे विवादों की जानकारी विधायकों को नहीं मिलने पर भी सवाल उठाए गए। उनका कहना था कि इस तरह की खींचतान से पार्टी की छवि और जमीनी स्तर पर संगठन प्रभावित हो रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता इस बात से असंतुष्ट हैं कि महत्वपूर्ण संगठनात्मक फैसले लेते समय कोर टीम के सदस्यों से सलाह नहीं ली जा रही है। बताया जा रहा है कि इसी नाराजगी को लेकर कुछ नेताओं ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी की एक वजह हालिया संगठनात्मक नियुक्तियां भी बताई जा रही हैं। मुंबई राकां अध्यक्ष पद पर जीशान सिद्दीकी और राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद पर उमेश पाटिल की नियुक्ति के फैसले को लेकर कुछ नेताओं का कहना है कि उनसे पहले चर्चा नहीं की गई। उनका मानना है कि पार्टी के महत्वपूर्ण निर्णयों में वरिष्ठ नेताओं की राय को भी महत्व मिलना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में मौजूद ज्यादातर विधायकों ने सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में विश्वास जताया। कुछ विधायकों को छोड़कर अन्य सदस्यों का कहना था कि दिवंगत अजित पवार ने उन्हें राजनीति में आगे बढ़ने के अवसर दिए थे। अब उनके नहीं रहने के बाद सुनेत्रा पवार ही उनका मार्गदर्शन कर रही हैं।
बैठक में विधायकों के समर्थन से सुनेत्रा पवार के नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर जारी चर्चाओं को नया मोड़ मिला है। हालांकि, वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी और संगठनात्मक फैसलों को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान किस तरह निकलेगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं के बीच होने वाली बातचीत से संगठन की आगे की रणनीति स्पष्ट हो सकती है।