पिंपरी-चिंचवड़ में पानी कटौती के बीच चहोली की सोसायटी को 40 नल कनेक्शन।
आठ साल से नए प्रोजेक्ट्स को पानी देने में असमर्थता जताती रही मनपा।
कनेक्शन मंजूरी और अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग।
Pimpri Chinchwad Water Crisis: पिंपरी शहर में पानी की किल्लत के चलते आम नागरिकों को एक दिन छोड़कर जलापूर्ति और अतिरिक्त कटौती का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, महानगरपालिका का जलापूर्ति विभाग कुछ बड़े बिल्डरों की आवासीय परियोजनाओं पर मेहरबान नजर आ रहा है। नए आवासीय प्रोजेक्ट्स को पानी उपलब्ध कराने में असमर्थता जताते हुए महानगरपालिका पिछले करीब आठ वर्षों से एनओसी जारी कर रही है। इन परियोजनाओं में पानी की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी भी बिल्डरों पर डाली गई है।
इसके बावजूद चहोली की एक बड़ी आवासीय सोसायटी को 40 नल कनेक्शन दिए जाने का मामला सामने आया है। आखिर पानी उपलब्ध नहीं कराने की शर्त के बावजूद ये कनेक्शन किस नियम और अधिकार के तहत दिए गए? क्या इसके लिए आवश्यक मंजूरियां ली गई थीं? शहर में पानी का नियोजन करने के नाम पर आम नागरिकों पर पाबंदियां लगाने वाले प्रशासन से इस दोहरे रवैये का जवाब मांगा जा रहा है।
पिंपरी-चिंचवड़ की आबादी और आवासीय विस्तार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन पानी की उपलब्धता उस अनुपात में नहीं बढ़ी है। आंद्रा और भामा आसखेड़ बांधों से अपेक्षित मात्रा में पानी उपलब्ध होने की प्रतीक्षा अब भी जारी है। मौजूदा व्यवस्था पर बढ़ते दबाव के कारण महानगरपालिका को जलापूर्ति में कटौती करनी पड़ रही है। शहर में एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है।
इसके अलावा 10 प्रतिशत अतिरिक्त कटौती भी लागू है। ऐसे हालात में उपलब्ध पानी का नियोजन और नए कनेक्शन देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। महानगरपालिका की ओर से नए आवासीय प्रोजेक्ट्स को जारी एनओसी में पिछले करीब आठ वर्षों से पानी उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई जा रही है।
आंद्रा और भामा आसखेड़ से पर्याप्त पानी मिलने तक निवासियों के लिए पानी की व्यवस्था बिल्डर को ही करनी होगी, ऐसी शर्त भी रखी जाती है यानी पानी की जिम्मेदारी बिल्डर की और कनेक्शन देने का अधिकार किसका? यही सवाल अब इस मामले में अहम हो गया है। एक तरफ शहर के नागरिकों को पानी बचाने की अपील की जाती है, कटौती झेलनी पड़ती है और नई परियोजनाओं के निवासियों को टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
दूसरी तरफ किसी एक परियोजना को 40 कनेक्शन मिलने की जानकारी सामने आना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस मामले में कनेक्शन मंजूरी के आदेश, एनओसी, तकनीकी रिपोर्ट और जलापूर्ति संबंधी रिकॉर्ड की जांच होनी चाहिए, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग गई गई है।
उपलब्ध जल भंडार का नियोजनबद्ध तरीके से वितरण करना महानगरपालिका के सामने बड़ी चुनौती है। ऐसे में यदि महानगरपालिका द्वारा निर्धारित नियमों का उल्लंघन कर जलापूर्ति वितरण किया जा रहा है या नल कनेक्शन देते समय भेदभाव किया जा रहा है, तो संबंधित मामलों की जानकारी ली जाएगी। इनकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।मनोज सेठिया, शहर अभियंता, पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका
चहॉली में एक बिल्डर की आवासीय परियोजना को 40 नल कनेक्शन दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
इतने बड़े पैमाने पर कनेक्शन जारी करने से पहले किन मानदंडों का पालन किया गया? क्या संबंधित अधिकारियों ने एनओसी की शर्तों और पानी की उपलब्धता की समीक्षा की? बिल्डर की
जिम्मेदारी के बावजूद पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका ने जलापूर्ति की व्यवस्था किस आधार पर स्वीकार की? इन सवालों पर प्रशासन की ओर से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है।
क्षेत्रीय कार्यालयों के स्तर पर नियमों को दरकिनार कर कनेक्शन दिए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।