पिंपरी-चिंचवड़ में जलभराव की बड़ी वजह उजागर, 365 प्राकृतिक नालों पर अतिक्रमण से बढ़ा खतरा

Pimpri Chinchwad News: पिंपरी-चिंचवड़ मनपा के सर्वेक्षण में 365 प्राकृतिक नालों के गायब होने का खुलासा हुआ है। बिल्डरों और अवैध कब्जाधारियों ने 93 नालों को पाट दिया, जिससे जलभराव हो रहा है।
Encroachment on 365 natural drains in Pimpri-Chinchwad revealed
पिंपरी-चिंचवड़ मनपासोर्स- सोशल मीडिया
Published on: 
Updated on: 

Highlights

  • पिंपरी-चिंचवड़ के 365 प्राकृतिक नालों पर अतिक्रमण का खुलासा।

  • 93 नाले पूरी तरह पाटे गए या उनका प्राकृतिक प्रवाह बदला गया।

  • पहले चरण में 67 नालों को अतिक्रमण मुक्त करने की योजना, काम बजट और टेंडर के इंतजार में।

Pimpri Chinchwad Drainage Encroachment: पिंपरी में हर साल मानसून के दौरान पिंपरी-चिंचवड़ शहर के निचले इलाकों, सोसायटियों और मुख्य सड़कों पर होने वाले भयंकर जलभराव की असली वजह अब आधिकारिक तौर पर सामने आ चुकी है।

पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका द्वारा कराए गए एक विस्तृत सर्वेक्षण में यह स्तब्ध करने वाला खुलासा हुआ है कि शहर के करीब 365 प्राकृतिक नालों पर अवैध निर्माण, सड़कों, पार्किंग स्थलों और बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट्स का निर्माण कर उनके अस्तित्व को ही मिटा दिया गया है।

अब तक क्यों नहीं हुई कार्रवाई ?

इस गंभीर स्थिति के बावजूद महानगरपालिका प्रशासन का सुस्त रवैया नागरिक सुरक्षा पर भारी पड़ रहा है। सर्वेक्षण रिपोर्ट सामने आने के बाद भी धरातल पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय फाइलें केवल एक विभाग से दूसरे विभाग में टहल रही हैं। शहर की जनता अब सीधे तौर पर सवाल उठा रही है कि जब जलभराव से लाखों नागरिक परेशान हो रहे हैं, तब अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाने और नालों को मुक्त कराने में महापालिका प्रशासन को किस बात की देरी है?

जल निकासी एवं निर्माण विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, शहर के 365 प्राकृतिक नालों में से 93 नाले ऐसे हैं जिन्हें बिल्डरों और अवैध कब्जाधारियों ने पूरी तरह पाट दिया है या उनके प्राकृतिक प्रवाह की दिशा ही बदल दी है। तेजी से हुए शहरीकरण के दौरान पवना, मुला और इंद्रायणी नदियों की ओर जाने वाले प्राकृतिक जल मार्गों पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर दी गईं।

कई स्थानों पर नालों को संकरे सीमेंट के पाइपों के भीतर बंद कर ऊपर से सड़कें और पार्किंग बना दी गई। परिणामस्वरूप, हल्की सी बारिश में भी प्राकृतिक जल निकासी ठप हो जाती है और पानी आवासीय परिसरों व सड़कों में घुसकर तबाही मचाता है। जनहित के इस संवेदनशील मुद्दे पर पिंपरी-चिंचवड़ महापालिका की ढिलाई यह दर्शाती है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति की भारी कमी है।

Encroachment on 365 natural drains in Pimpri-Chinchwad revealed
50 हजार मतदाता सूची से गायब! नालासोपारा विधानसभा में वोटर लिस्ट को लेकर घमासान

बजट और टेंडर का बहाना कब तक ?

प्रशासन ने सर्वेक्षण के आधार पर प्राथमिकता तय करते हुए 365 में से केवल 67 नालों को पहले चरण में अतिक्रमण मुक्त करने का निर्णय लिया है। इसके लिए शहर अभियंता विभाग द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसमें संकरे पाइप हटाकर बड़े आकार के 'बॉक्स कल्वर्ट' बनाने का प्रस्ताव है। लेकिन, चौंकाने वाली बात यह है कि इस रिपोर्ट के बनने के बाद भी काम रुका हुआ है।

प्रशासन का कहना है कि आयुक्त की मंजूरी, निधि (बजट) की उपलब्धता और निविदा (टेंडर) प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रत्यक्ष काम शुरू होगा। जल निकासी विभाग के सह शहर अभियंता विनय ओहोल ने भी माना कि निधि मिलने के बाद ही निविदाएं जारी होगी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मानसून सिर पर आता है या तबाही मचा चुका होता है।।

Encroachment on 365 natural drains in Pimpri-Chinchwad revealed
मीरा भाईंदर में सीवर योजना पर विवाद: पहला चरण 18 साल बाद भी अधूरा, 476 करोड़ के दूसरे चरण को महासभा की मंजूरी

नागरिकों की सुरक्षा से साथ खिलवाड़

गावों से उपनगर और अब स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहे पिपरी-चिंचवड में प्राकृतिक नालों का गायब होना सीधे तौर पर बिल्डरों और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित साठगांठ की ओर इशारा करता है।

नियमों को ताक पर रखकर प्राकृतिक जल प्रवाह को बाधित करने वाले निर्माणों को मंजूरी कैसे मिली, इसकी जांच करने के बजाय महापालिका केवल कागजी बैठकों और सर्वेक्षणों तक सीमित है। यद्यपि महानगरपालिका आयुक्त ने वरिष्ठ स्तर पर बैठकें कर नालों से अतिक्रमण हटाने के सख्त निर्देश जारी किए है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अभी तक एक भी बड़े अतिक्रमणकारी पर प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई है।

Navbharat Live
navbharatlive.com