प्रदर्शन के नाम पर कब्जा नहीं कर सकते...जंतर-मंतर प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- तय हो समय और जगह

Delhi Protest Case: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों को लेकर अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि कोई भी संगठन अनिश्चितकाल तक सार्वजनिक जगहों पर कब्जा नहीं कर सकता है।
Supreme Court on Delhi Protest
दिल्ली प्रोटेस्ट मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा, प्रदर्शन के नाम पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं कर सकते

  • कोर्ट ने प्रोटेस्ट के लिए निर्धारित जगह और समय की जरूरत बताई

  • जंतर-मंतर और रामलीला मैदान में हुए प्रदर्शनों पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी

Supreme Court on Delhi Protest: सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली सेंट्रल दिल्ली प्रोटेस्ट मामले में सुनवाई करते हुए एक अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि कोई भी प्रदर्शन के नाम पर अनिश्चित काल तक किसी जगह पर कब्जा नहीं कर सकता है। ऐसी गतिविधि के लिए तय जगहों का भी एक तय समय होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी पिछले महीने सेंट्रल दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए बड़े प्रदर्शन और हाल ही में रामलीला मैदान में विपक्षी पार्टियों और दूसरों द्वारा भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किए गए प्रदर्शन पर सुनवाई के दौरान कही। सरकार ने जंतर-मंतर से तय धरना स्थल की सूची से हटा दिया है और रामलीला मैदान समेत तीन दूसरी जगहों का ऐलान किया।

हर किसी को प्रदर्शन करने का अधिकार है

सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जो कोई भी प्रदर्शन का आह्वान करता है, उसे अपने कामों के नतीजे की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इस पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, आप हमेशा के लिए किसी जगह पर कब्जा नहीं कर सकते। दूसरे प्रदर्शनकारी भी हैं। किसान या वकील कहां जाएंगे? 

बेंच ने आगे कहा कि, हर किसी को प्रदर्शन करने का अधिकार है। उन्होंने व्यापारी संगठन की उस याचिका पर केंद्र और दूसरों से जवाब मांगा, जिसमें त्योहारों के सीजन के दौरान प्रदर्शन रोकने की मांग की गई थी।

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सीजेपी ने जंतर-मंतर पर कब्जा किया

तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 20 जुलाई के प्रदर्शन की अनुमति केवल एक दिन के लिए दी गई थी, लेकिन प्रदर्शन करने वालों ने उस जगह पर कब्जा कर लिया और संसद तक मार्च भी किया। उन्होंने कहा, संसद केवल एक और राजनीतिक भवन नहीं है। आप संसद तक मार्च नहीं कर सकते। आप सुप्रीम कोर्ट तक मार्च नहीं कर सकते।

बेंच कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें व्यापारियों की तरफ से दाखिल की गई याचिका भी शामिल थी, जिसमें कथित तौर पर बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेने, पुलिस की बर्बरता, मेट्रो स्टेशन बंद करने और इंटरनेट बंद करने के मुद्दे शामिल थे। 

सुप्रीम कोर्ट ने व्यापारियों से क्या कहा?

बेंच ने व्यापारी संगठन से कहा कि वे CEC के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को भी व्यापार के नुकसान को लेकर अपनी याचिका में पार्टी बनाएं। व्यापारियों की तरफ से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि प्रदर्शन वाली जगह के पास के इलाकों में करीब 50 लाख लोग रहते हैं और सभी दुकानें बंद रहीं और कनॉट प्लेस में कोई नहीं था।

इसपर कोर्ट ने कहा कि जब तक व्यापारियों की बॉडी सभी प्रदर्शनकारी संगठनों को पार्टी नहीं बनाती, तब तक कोर्ट किसी भी मुद्दे पर फैसला नहीं कर सकता। 

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