

पिंपरी में अक्टूबर में डेंगू के 99 और मलेरिया के 15 मरीज मिले।
वाईसीएम अस्पताल में एसडीपी का स्टॉक खत्म, आरडीपी के 50 बैग उपलब्ध।
त्योहारों में रक्तदान शिविर घटने से प्लेटलेट्स की उपलब्धता प्रभावित।
Pimpri Dengue Malaria YCM Hospital: पिंपरी शहर में डेंगू और मलेरिया के बढ़ते मामलों के बीच मरीजों के उपचार के लिए प्लेटलेट्स की व्यवस्था करना चुनौती बनता जा रहा है। अक्टूबर में डेंगू के 99 और मलेरिया के 15 मरीज सामने आए हैं।
इसी बीच वाईसीएम अस्पताल के ब्लड सेंटर में सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) का स्टॉक पूरी तरह समाप्त हो गया है। ऐसे में जरूरत पड़ने पर गंभीर मरीजों के परिजनों को रक्तदाताओं की तलाश में भागदौड़ करनी पड़ रही है।
वाईसीएम अस्पताल के ब्लड सेंटर में रैंडम डोनर प्लेटलेट्स (आरडीपी) के 50 बैग उपलब्ध थे। इनमें ए पॉजिटिव के 10, बी पॉजिटिव के 11, जबकि एबी पॉजिटिव और ओ पॉजिटिव के 15-15 बैग शामिल थे। इनमें से 36 बैग की मांग प्राप्त हुई थी। अस्पताल प्रशासन उपलब्ध स्टॉक के जरिए मरीजों की जरूरत पूरी करने का प्रयास कर रहा है।
हालांकि, सिंगल डोनर प्लेटलेट्स उपलब्ध नहीं होने से गंभीर मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। एसडीपी विशेष मशीन के जरिए एक ही रक्तदाता से प्राप्त किए जाते हैं। इसके एक यूनिट में आरडीपी की तुलना में करीब पांच से सात गुना अधिक प्लेटलेट्स होते हैं। मरीज की स्थिति और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इनका इस्तेमाल किया जाता है।
दशहरा और दीपावली के दौरान रक्तदान शिविरों की संख्या कम होने से ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स की उपलब्धता प्रभावित होती है। प्लेटलेट्स की जीवन अवधि महज पांच दिन होने के कारण इन्हें लंबे समय तक संग्रहित नहीं किया जा सकता। ऐसे में नियमित रक्तदाताओं की उपलब्धता बेहद जरूरी है।
एक ओर डेंगू और मलेरिया के मरीज बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई इलाकों में मच्छरों के प्रकोप की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। सोसायटियों, निर्माण स्थलों और टायर दुकानों पर जमा पानी से मच्छरों के प्रजनन का खतरा बना हुआ है। नागरिकों का आरोप है कि नियमित छिड़काव और जांच नहीं हो रही है। गप्पी मछलियों के मुफ्त वितरण को लेकर भी शिकायतें हैं। पिंपरी मनपा क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से वितरण का दावा करती है, लेकिन वार्ड स्तर पर यह व्यवस्था प्रभावी नहीं होने की बात कही जा रही है।
वाईसीएम अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेंद्र वाबले के अनुसार, प्लेटलेट्स की जीवन अवधि केवल पांच दिन होती है, इसलिए इनका बड़ा स्टॉक रखना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में फिलहाल मरीजों की संख्या कम है। निजी अस्पतालों में मरीज होने पर जरूरत के अनुसार सिंगल डोनर को बुलाया जाता है।
वहीं, पिंपरी शहर सिल्वरलाइन ब्लड सेंटर के प्रशासनिक अधिकारी दीपक पाटिल ने कहा कि डेंगू के मरीजों की बढ़ती संख्या और प्लेटलेट्स की सीमित उपलब्धता चिंता का विषय है। कम जीवन अवधि के कारण इनका बड़े पैमाने पर भंडारण संभव नहीं है।